मेरी छोटी साली – जीजा साली सेक्स

मेरी-छोटी-साली-जीजा-साली-सेक्स

रात गहरी हो चुकी थी, घर की हर आवाज़ थम चुकी थी। सिर्फ़ बाहर गली में कभी-कभी कोई कुत्ता भौंकता, या हवा पेड़ों की पत्तियों से खेलती। प्रणव बिस्तर पर करवटें बदल रहा था। उसकी पत्नी, नेहा, गहरी नींद में थी—शादी के बाद की थकान और घर की सारी जिम्मेदारियाँ उसे चूर कर चुकी थीं। लेकिन प्रणव की आँखों में नींद नहीं थी। उसका मन कहीं और अटका था। आज शाम से रुचिका की वो छोटी-छोटी हरकतें, वो हँसी, वो नज़रें जो चुपके से उस पर टिक जाती थीं—सब उसके दिमाग में घूम रहे थे। रुचिका, नेहा की छोटी बहन, जो पिछले हफ्ते ही कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके घर लौटी थी। उम्र में सिर्फ़ बाईस की, लेकिन बॉडी में वो जवानी जो किसी को भी बेकाबू कर दे। गोरी चमड़ी, पतली कमर, भरी छातियाँ और वो गोल गाँड जो सलवार सूट में भी साफ़ नजर आती थी।

प्रणव धीरे से उठा। कमरे का दरवाज़ा खुला छोड़कर बाहर निकला। आँगन में ठंडी हवा लगी, लेकिन वो छत की तरफ़ बढ़ गया। सीढ़ियाँ चढ़ते हुए उसके कदम भारी थे। मन में एक अजीब-सा डर और उत्तेजना दोनों थे। छत पर पहुँचा तो चाँदनी चारों तरफ़ बिखरी हुई थी। हवा में सर्दी थी, जनवरी की वो ठंड जो हड्डियों तक उतर जाती है। प्रणव मुंडेर से टिक गया, सिगरेट निकाली, लेकिन सुलगाई नहीं। बस हाथ में पकड़े रहा। तभी सीढ़ियों से हल्की-हल्की चूड़ियों की खनक सुनाई दी। रुचिका थी। वो ऊपर आई, पतला सा नाइट गाउन पहने, बाल खुले हुए, चेहरे पर हल्की थकान लेकिन आँखों में चमक। “जीजा जी… आप यहाँ?” उसकी आवाज़ में आश्चर्य था, लेकिन वो आश्चर्य झूठा नहीं लग रहा था। प्रणव मुड़ा, “नींद नहीं आ रही थी रुचिका। तुम?” रुचिका पास आई, मुंडेर पर टिकी, “मुझे भी नहीं। घर में इतने लोग, शोर… दिमाग ठहरता नहीं।”

दोनों के बीच थोड़ी दूरी थी, लेकिन हवा में एक अजीब-सा तनाव फैल गया। रुचिका का गाउन हवा में हल्का-हल्का लहरा रहा था। प्रणव की नजर उसकी जाँघों पर गई, जहाँ गाउन थोड़ा ऊपर सरक गया था। गोरी जाँघें चाँदनी में चमक रही थीं। प्रणव का मन बोला, “कितनी खूबसूरत है ये। नेहा से अलग, लेकिन उतनी ही आकर्षक। आज शाम जब वो किचन में मेरे सामने झुकी थी, गले से ब्रा की झलक दिखी थी। वो छातियाँ… कितनी भरी हुई।” लेकिन बाहर से वो चुप रहा। रुचिका ने भी महसूस किया उसकी नजर। वो शर्मा गई, लेकिन कुछ बोली नहीं। बस सिर झुका लिया। “जीजा जी… आप हमेशा ऐसे चुप क्यों रहते हैं?” प्रणव ने हल्के से मुस्कुराकर कहा, “क्या बोलूँ रुचिका? तुम्हारी दीदी नीचे सो रही है।” रुचिका ने आँखें उठाईं, “हाँ… लेकिन आज रात सब सो गए हैं। कोई नहीं जागेगा।”

See also  देवर ने वो दिया जो पति ने नहीं दिया

चुप्पी छा गई। सिर्फ़ हवा की सरसराहट और दोनों की साँसों की हल्की आवाज़। प्रणव ने धीरे से उसका हाथ छुआ। रुचिका का हाथ ठंडा था, लेकिन स्पर्श होते ही गर्म हो गया। वो हाथ छुड़ाने की कोशिश नहीं की। बस उँगलियाँ हल्के से कस गईं। “रुचिका… ये गलत है।” प्रणव की आवाज़ में कंपन था। रुचिका ने कहा, “पता है जीजा जी। लेकिन… मन नहीं मान रहा।” प्रणव ने उसे अपनी तरफ़ खींचा। अब दोनों इतने करीब थे कि उनकी साँसें मिल रही थीं। रुचिका की आँखें बंद हो गईं। प्रणव ने उसके गाल पर हाथ फेरा, फिर गर्दन पर। “तुम्हारी स्किन कितनी मुलायम है।” रुचिका काँप उठी। “जीजा जी… डर लग रहा है।” लेकिन वो पीछे नहीं हटी। प्रणव ने धीरे से उसके होंठों पर होंठ रख दिए। पहला चुंबन—नरम, हिचकिचाहट भरा। रुचिका ने पहले तो रुकावट दिखाई, लेकिन फिर जवाब दिया। जीभें मिलीं। चुंबन गहरा हुआ। प्रणव के हाथ उसकी कमर पर सरके, गाउन के ऊपर गाँड को छुआ। “रुचिका… तुम्हारी गाँड कितनी गोल और मुलायम है।” रुचिका की सिसकारी निकली, “आह… जीजा जी… धीरे।”

चुंबन लंबा चला। दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। प्रणव ने गाउन का पट्टा खींचा। गाउन खिसककर नीचे गिरा। अंदर सिर्फ़ ब्रा और पैंटी। रुचिका की गोरी बॉडी चाँदनी में नंगी-सी लग रही थी। प्रणव ने ब्रा के हुक खोले। छातियाँ बाहर आईं—गोल, भरी, निप्पल्स सख्त। प्रणव ने उन्हें हाथों में भरा। “कितनी नरम हैं।” फिर मुँह में लिया, चूसने लगा। रुचिका की पीठ झुक गई। “ओह… जीजा जी… चूसो उन्हें। कितना अच्छा लग रहा है।” उसकी उँगलियाँ प्रणव के बालों में फँस गईं। नीचे उसकी चूत में गीलापन फैल रहा था। प्रणव की उँगलियाँ पैंटी पर गईं। पैंटी गीली थी। “रुचिका… तुम कितनी गीली हो। तुम्हारी चूत मेरे लिए तरस रही है।” रुचिका ने जाँघें हल्के से खोलीं। “हाँ… छू लो जीजा जी। मैं भी सोचती हूँ आपकी बारे में। रातों को अकेले में।”

प्रणव ने पैंटी उतार दी। रुचिका अब पूरी नंगी। वो छत के कोने में पुरानी चारपाई पर लेट गई। प्रणव ने अपने कपड़े उतारे। उसका लंड सख्त, बड़ा, नसों से भरा। रुचिका ने देखा तो आँखें फैल गईं। “जीजा जी… कितना मोटा है आपका लंड।” उसने हाथ बढ़ाकर सहलाया। गर्माहट महसूस की। फिर मुँह में लिया, जीभ से चाटा। प्रणव की आह निकली। “रुचिका… कितना अच्छा कर रही हो।” वो उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे अंदर-बाहर कर रहा था। रुचिका की चूत अब और गीली हो गई। वो सोच रही थी, “ये मेरी पहली बार है किसी के साथ। लेकिन जीजा जी के साथ… कितना अच्छा लग रहा है।”

See also  बहन की चूत में भाई का लंड: एक हॉट चुदाई की कहानी

प्रणव उसके ऊपर आया। दोनों की बॉडी चिपक गईं। प्रणव ने उसके होंठ फिर चूमे। गहरा चुंबन। हाथ छातियों पर, कमर पर, गाँड पर। रुचिका अब बिना हिचकिचाहट के जवाब दे रही थी। प्रणव ने लंड चूत पर रगड़ा। रुचिका की आह निकली। “जीजा जी… डालो धीरे से।” प्रणव ने धीरे से धक्का दिया। लंड अंदर गया। रुचिका की आँखों में आँसू आ गए—दर्द और सुख दोनों। “आह… दर्द हो रहा है… लेकिन रुको मत।” प्रणव धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। रुचिका की कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। वो उसका साथ दे रही थी। “हाँ… गहरा मारो। मेरी चूत तुम्हारी है जीजा जी।” प्रणव की गति तेज़ हुई। दोनों का पसीना मिल रहा था। प्रणव ने उसकी गाँड जोर से दबाई। “रुचिका… तुम्हारी गाँड कितनी सेक्सी है।” रुचिका ने कहा, “चुप… बस चोदो मुझे। फाड़ दो मेरी चूत।”

वे दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे में खोए रहे। धक्के तेज़ होते गए। रुचिका की सिसकारियाँ दबी हुईं। आखिरकार दोनों का क्लाइमेक्स आया। प्रणव ने अंदर ही झड़ दिया। रुचिका की बॉडी काँप उठी। वो लंबे समय तक ऐसे ही लेटी रही, साँसें तेज़। प्रणव उसके ऊपर लेटा रहा।

बाद में दोनों चुपचाप लेटे थे। ठंडी हवा अब लग रही थी। रुचिका की आँखों में आँसू थे। “जीजा जी… हमने क्या कर दिया? दीदी को पता चला तो?” उसकी आवाज़ काँप रही थी। guilt और पछतावा साफ़ था। प्रणव ने उसे गले लगाया। “रुचिका… मैं नहीं चाहता था ये हो। लेकिन… मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ। ये सिर्फ़ शरीर नहीं, दिल भी है।” रुचिका ने कुछ नहीं कहा। बस उसकी छाती पर सिर रख दिया। वो सोच रही थी, “ये रिश्ता अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा। लेकिन आज की रात… कितनी खूबसूरत थी। सुख मिला, लेकिन डर भी है।” प्रणव ने उसके माथे पर चुंबन किया। “कल सुबह सब सामान्य होगा। लेकिन हम जानते हैं।” रुचिका ने धीरे से कहा, “जीजा जी… अगली बार… मत आने छत पर।” लेकिन दोनों जानते थे कि ये आखिरी नहीं था। रात धीरे-धीरे बीत रही थी। नीचे घर में सब सोए हुए थे, लेकिन उनकी दुनिया अब अलग थी। एक गुप्त, गहरा, भावुक रिश्ता जो अब टूट नहीं सकता था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *