मुंबई मानसून रात – भाभी देवर भैया की सेक्स कहानी

मुंबई की वो मानसून वाली रात थी, जब आसमान फट पड़ता है और सारी शहर की भागदौड़ एक पल के लिए रुक जाती है। पूजा खिड़की के पास खड़ी थी, साड़ी की पल्लू बार-बार सरक रही थी क्योंकि बाहर से आती ठंडी हवा उसे छू रही थी। फ्लैट का बालकनी छोटा-सा था, लेकिन उसमें भी बारिश की बूंदें तेज़ी से गिर रही थीं। नीचे सड़क पर पानी भर गया था, और लोकल ट्रेन की आवाज़ दूर से आ रही थी—एक लंबी, थकी हुई सीटी।

अमित सुबह ही पुणे गया था। मीटिंग थी, बोला था—“शायद दो दिन लग जाएँ।” पूजा ने बस “ठीक है” कहा था, लेकिन मन में एक अजीब-सी राहत थी। घर में अब सिर्फ वो और राहुल थे। राहुल—उसका देवर, जो अभी भी कॉलेज के बाद की जिंदगी जी रहा था। दिन में जॉब, शाम को जिम, और रात को घर लौटकर टी-शर्ट-शॉर्ट्स में टीवी देखना।

पूजा ने बालकनी में कदम रखा। पानी की बूंदें उसके पैरों पर गिरीं। ठंड लगी, लेकिन वो रुकी नहीं। उसने साड़ी ऊपर उठाई, जाँघों तक। बारिश की बूंदें त्वचा पर टकरा रही थीं, ठंडी, लेकिन अंदर से एक गर्मी उठ रही थी। वो सोच रही थी—“कितने साल हो गए… अमित को छूए हुए। वो आता है, थककर सो जाता है। कभी पूछता भी नहीं कि मैं कैसी हूँ।”

तभी पीछे से आवाज़ आई।

“भाभी… आप भीग रही हैं।”

राहुल था। वो भी बालकनी में आ गया था। सिर्फ़ काली टी-शर्ट और ग्रे शॉर्ट्स। बारिश की वजह से उसकी टी-शर्ट चिपक गई थी। छाती की लकीरें, पेट पर वो हल्की-सी उभार—पूजा की नजर वहाँ अटक गई। राहुल ने तौलिया हाथ में पकड़ा हुआ था।

“लो, पोंछ लो,” उसने कहा।

पूजा ने तौलिया लिया, लेकिन पोंछा नहीं। बस उसी हाथ में पकड़े रही। राहुल करीब आया। इतना करीब कि पूजा को उसकी बॉडी से आने वाली हल्की साबुन और पसीने की मिली-जुली खुशबू मिली।

“भाभी… ठंड लग रही होगी,” राहुल ने धीरे से कहा। उसकी आवाज़ में एक नरमी थी।

पूजा ने सिर हिलाया। “हाँ… लेकिन अच्छा भी लग रहा है।”

दोनों चुप हो गए। बारिश की आवाज़ और तेज़ हो गई। बिजली चली गई। पूरा फ्लैट अंधेरा। सिर्फ़ बाहर की सड़क की लाइट्स से हल्की-सी रोशनी आ रही थी।

राहुल ने धीरे से पूजा का हाथ पकड़ा। “अंदर चलें?”

पूजा ने हाथ नहीं छोड़ा। “नहीं… यहीं ठीक है।”

राहुल ने उसकी तरफ़ देखा। पूजा की आँखें गीली थीं—बारिश की वजह से या कुछ और। राहुल ने उसकी कमर पर हाथ रख दिया। सिर्फ़ रखा। दबाया नहीं। पूजा का शरीर सिहर उठा। वो खुद को रोक नहीं पाई। उसने राहुल की छाती पर सिर टिका दिया।

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“राहुल… ये गलत है,” वो फुसफुसाई।

“तो रोक दो,” राहुल ने कहा। उसकी साँस पूजा के बालों में जा रही थी।

पूजा ने सिर नहीं उठाया। उसने राहुल की टी-शर्ट पकड़ी। धीरे से ऊपर खींची। राहुल ने हाथ ऊपर किए। टी-शर्ट उतर गई। उसकी नंगी छाती बारिश की बूंदों से चमक रही थी। पूजा ने उंगलियों से छुआ। ठंडी त्वचा, लेकिन नीचे से गर्मी।

राहुल ने पूजा को अपनी तरफ़ खींचा। उनके होंठ मिले। पहले हल्का। जैसे दोनों डर रहे हों। फिर गहरा। पूजा की जीभ राहुल की जीभ से खेल रही थी। बारिश दोनों पर गिर रही थी। पूजा की साड़ी पूरी भीग चुकी थी। ब्लाउज़ पारदर्शी हो गया था। राहुल ने उसकी पीठ पर हाथ फेरा। ब्रा की हुक तक पहुँचा। एक हुक खोली।

पूजा की साँस तेज़। “राहुल… कोई देख लेगा…”

“कौन देखेगा? सब सो रहे हैं,” राहुल ने उसके कान में कहा और गले पर होंठ रख दिए। चूमा, चाटा। पूजा की आह निकल गई। “आह…”

राहुल ने पूजा को बालकनी की रेलिंग पर टिकाया। उसकी साड़ी ऊपर सरकाई। जाँघें नंगी। राहुल ने घुटनों के बल बैठकर पूजा की जाँघों को चूमा। बारिश की बूंदें और उसकी जीभ—दोनों मिलकर पूजा को पागल कर रहे थे। पूजा ने राहुल के बाल पकड़े। “ऊपर… ऊपर आओ…”

राहुल उठा। पूजा की पैंटी पर हाथ रखा। गीली थी। बहुत गीली। राहुल ने उंगली अंदर डाली। पूजा का शरीर काँप उठा। “राहुल… अंदर… और अंदर…”

राहुल ने दूसरी उंगली भी डाली। धीरे-धीरे अंदर-बाहर। पूजा की कमर उठ रही थी। वो बालकनी की रेलिंग पकड़कर टिकी थी। “जोर से… राहुल… जोर से…”

तभी बाहर से आवाज़। कुंजी की छनक। मुख्य दरवाज़ा खुला।

अमित।

दोनों रुक गए। पूजा ने साड़ी नीचे की। राहुल ने जल्दी से टी-शर्ट पहनी। अमित अंदर आया। गीला हुआ। “ट्रेन कैंसल हो गई… वापस आ गया।”

वो बालकनी की तरफ़ आया। लाइट मोबाइल से जलाई। पूजा और राहुल को देखा। दोनों भीगे हुए। पूजा की साड़ी गीली, ब्लाउज़ सरका हुआ। राहुल की साँसें तेज़।

अमित कुछ देर चुप रहा। फिर बोला, “मैं सब समझ गया।”

पूजा रो पड़ी। “अमित… मैं… सॉरी…”

अमित ने पास आकर पूजा का चेहरा उठाया। “रो मत। मैं गुस्सा नहीं हूँ।”

फिर राहुल की तरफ़ देखा। “तू भी… मैं जानता हूँ। सालों से पूजा को देखता है तू।”

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राहुल ने सिर झुका लिया।

अमित ने गहरी साँस ली। “मैं भी थक गया हूँ। पूजा को खुश नहीं कर पाता। जॉब, ट्रैवल… लेकिन मैं चाहता हूँ वो खुश रहे। अगर तू कर सकता है… तो आज रात… हम तीनों…”

पूजा ने आश्चर्य से देखा। अमित ने उसका हाथ पकड़ा। “पूजा… मुझे मंज़ूर है। अगर तुझे अच्छा लगे।”

पूजा ने कुछ नहीं कहा। बस अमित को गले लगाया। फिर राहुल को। तीनों अंदर आए। दरवाज़ा बंद।

बेडरूम में। लाइट ऑफ। सिर्फ़ मोबाइल की हल्की रोशनी।

अमित ने पूजा को चूमा। गहरा, भूखा। राहुल पीछे से आया। पूजा की साड़ी उतारी। ब्लाउज़ खोला। स्तन बाहर। अमित ने एक चूसा, राहुल ने दूसरा। पूजा की आहें कमरे में गूंज रही थीं। “आह… दोनों… दोनों साथ…”

राहुल ने पूजा को बेड पर लिटाया। टाँगें फैलाईं। उसकी चूत पर जीभ रखी। चाटने लगा। पूजा सिसक रही थी। अमित ने अपना लुंड पूजा के मुँह में दिया। पूजा चूस रही थी। दोनों तरफ़ से।

फिर अमित ने पूजा में घुसा। धीरे-धीरे। पूजा की आह। “अमित… कितने दिन बाद…”

राहुल नीचे लेटा। पूजा की चूत चाट रहा था, जहाँ अमित का लुंड अंदर-बाहर हो रहा था। पूजा पागल हो रही थी। “राहुल… चाटो… जोर से…”

फिर राहुल ने पूजा को पीछे से लिया। उसकी गांड पर थप्पड़। पूजा चीखी। “आह… राहुल… फाड़ दो…”

अमित सामने। पूजा उसका लुंड चूस रही थी। तीनों का शरीर एक हो गया। पसीना, बारिश का पानी, रस—सब मिल गया।

रात भर। कभी अमित पूजा को लेता, राहुल चूसता। कभी राहुल पीछे से, अमित सामने से। कभी पूजा दोनों के लुंड को हाथ में पकड़कर सहलाती। दोनों उसके मुँह में बारी-बारी।

सुबह बारिश थम गई। तीनों थककर लेटे। अमित ने पूजा को गले लगाया। “अब से… जब भी मैं बाहर जाऊँ, राहुल रहेगा। तू खुश रहेगी।”

पूजा ने मुस्कुराकर कहा, “और तुम?”

अमित ने हँसकर कहा, “मैं भी शामिल हूँगा। जब घर आऊँगा।”

राहुल चुपचाप दोनों को देख रहा था।

उस रात के बाद मुंबई की बारिश हर बार अलग लगने लगी। घर की खामोशी में अब एक गर्माहट थी। तीनों की आँखें मिलतीं तो एक मुस्कान। और रातें… अब और गहरी, और गरम।

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