मम्मी की नंगी चूत देखकर बेटा हुआ बेकाबू

Mummy ko choda sex story, Maa beta chudai sex story, Mummy ko pata kar choda hindi sex story: हैलो दोस्तों, कैसे हो आप लोग। आज मैं आप लोगों को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाता हूं कि कैसे मैंने अपनी माँ को पटाकर उनकी चूत चोदी। कैसे माँ को मनाया, कैसे वो चुदने को तैयार हुईं। मेरा नाम चंदन कुमार गुप्ता है। मेरी माताजी का नाम चंदा देवी है। पापा अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, साल में कम से कम छह महीने घर पर और छह महीने बाहर। इस बार तो कंपनी के काम से दुबई जाना पड़ा, वो भी छह महीने के लिए। अब घर में सिर्फ हम दोनों थे, मैं और मम्मी। बड़ा भाई हॉस्टल में रहता है, गर्मियों की छुट्टियों में ही घर आता है।

मेरी उम्र करीब 20 साल की थी और मम्मी की 36 के आसपास। मम्मी देखने में बहुत सुंदर हैं, पिछवाड़ा फैला हुआ, फिगर मेंटेन किया हुआ, चूचियां बड़ी-बड़ी, आंखें हिरनी जैसी। पड़ोसी उन्हें देखकर आहें भरते थे, कई ने ट्राई भी मारी लेकिन कोई कामयाब नहीं हुआ। मैं कभी मम्मी की तरफ उस नजर से नहीं देखता था।

मगर एक दिन की बात है। मम्मी नहाकर बाथरूम से निकलीं और बदन पर सिर्फ टॉवल लपेट रखा था। मैं नहाने जा रहा था कि अचानक मम्मी सामने आ गईं और हम टकरा गए। इस चक्कर में मम्मी का टॉवल खुल गया और वो पूरी तरह नंगी हो गईं। मैं अवाक रह गया, मम्मी की चूचियां देखीं, फिर उनके झांटों वाली चूत को। झांट अच्छे से सजी हुई लग रही थी, हल्की-हल्की काली और घनी, चूत की दरार साफ नजर आ रही थी, गुलाबी होंठ थोड़े फूले हुए। हड़बड़ी में मम्मी दोनों हाथों से चूचियां और नीचे ढकने की कोशिश करती हुईं बिना टॉवल के ही कमरे में भाग गईं, उनका पिछवाड़ा हिलता हुआ दिखा।

भाई साहब, पहली बार किसी औरत की चूचियां और झांट देखी थीं। मेरा बदन एकदम गर्म हो गया, लंड निक्कर में सख्त होकर फड़फड़ाने लगा। दिमाग बार-बार उसी नजारे पर चला जाता था – मम्मी की बड़ी-बड़ी चूचियां, गुलाबी निप्पल्स जो ठंड से सख्त हो गए थे, और वो झांटों के बीच छिपी चूत। मैं नहाकर अपने रूम में गया लेकिन दिमाग उसी में अटका रहा, बार-बार वो सीन आंखों के सामने घूम रहा था। इतने में मम्मी चाय लेकर आईं, साड़ी पहने हुए, ब्लाउज में से चूचियां उभरी हुईं। उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। लेकिन मेरा दिमाग झांटों और चूत पर अटका था। अब मुझे फिर से वो सब देखने का भूत सवार हो गया।

रात को खाना खाने के बाद मम्मी ने कहा, “बेटा, तुम्हारे पापा तो नहीं हैं। तुम मेरे रूम में पढ़ाई कर सकते हो, चाहो तो वहीं सो भी जाना। मैं सत्संग जा रही हूं, आने में देर हो जाएगी।” मैंने कहा, “ओके मम्मी।”

करीब 11 बजे रात को मम्मी कमरे में आईं। मुझे सोता जानकर उन्होंने दरवाजा बंद किया और धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगीं। पहले साड़ी निकाली, फिर ब्लाउज, पेटीकोट, ब्रा और पैंटी सब उतारकर पूरी नंगी हो गईं। मैं आंखें थोड़ी खोलकर देख रहा था, उनका बदन चांदनी रात में चमक रहा था। मम्मी बाथरूम में जाकर नहाईं, फिर तौलिया से पोंछकर वापस आईं। मुझे सोता समझकर वो पूरी नंगी ही बॉडी क्रीम की बोतल लेकर बेड पर बैठ गईं।

उन्होंने क्रीम हाथ में ली और पहले गर्दन, कंधे, फिर चूचियों पर लगानी शुरू की। चूचियां मसलते हुए क्रीम फैलाईं, निप्पल्स को उंगली से रगड़ती हुईं। फिर पेट पर, कमर पर, और जब हाथ नीचे चूत पर पहुंचा तो वो रुक गईं। बड़े प्यार से चूत के ऊपर वाले हिस्से पर क्रीम लगाई, झांटों को सहलाया। फिर उंगली चूत की दरार में फिसलाकर अंदर डालने लगीं। धीरे-धीरे उंगली अंदर-बाहर करने लगीं, दूसरी उंगली से क्लिटोरिस को रगड़ने लगीं। उनकी सांसें तेज हो गईं, “आह… इह्ह…” छोटी-छोटी सिसकारियां निकलने लगीं। उंगली पर चिपचिपा पानी जैसा रस लगा हुआ था, वो उसे चाट भी लिया। चूत से हल्की-हल्की खुशबू आ रही थी, गीली होकर चमक रही थी।

काफी देर तक वो खुद को सहलाती रहीं, फिर थोड़ा थककर नाइटी उठाकर पहन लीं। नाइटी बहुत पतली थी, अंदर कुछ नहीं पहना था। वो मेरे बगल में लेट गईं, उनकी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं, बदन गर्म था। कुछ देर बाद मैं भी सो गया।

रात को पेशाब लगने से मैं उठा तो देखा मम्मी की नाइटी जांघों तक पूरी तरह ऊपर चढ़ी हुई थी। हल्की रोशनी में उनका गोरा बदन चमक रहा था। मैंने धीरे-धीरे, बहुत सावधानी से नाइटी को और ऊपर सरकाया, कमर तक पहुंचा दिया। अब मम्मी की चूत और झांट पूरी तरह साफ नजर आ रही थीं – घनी काली झांटें, बीच में गुलाबी दरार, थोड़ी गीली चमक रही थी। मेरा लंड निक्कर में पहले से ही सख्त था, अब और फड़फड़ा उठा, जैसे फटने को तैयार हो। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। अभी मैं सोच ही रहा था कि क्या करूं, तभी मम्मी नींद में पलट गईं और अपनी गांड मेरी तरफ कर लीं। उनका पिछवाड़ा गोल-मटोल, नरम, मेरे सामने था। मेरा लंड एकदम जल उठा, जैसे आग लग गई हो। मन ही मन कसम खा ली – आज तो चोदकर ही रहूंगा, चाहे जो हो जाए।

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मैं धीरे से मम्मी से सट गया, अपना बदन उनके बदन से चिपका लिया। एक टांग उठाकर उनके हिप पर रख दी, ताकि ज्यादा करीब आ सकूं। अपना निक्कर थोड़ा नीचे सरकाया और खड़ा लंड ठीक उनकी गांड के छेद पर सटा दिया। लंड का सुपारा उनके नरम गुद्दे पर दब रहा था, गर्मी महसूस हो रही थी। लंड पहले से ही पूरा तना हुआ था, सिरा चिपचिपा हो चुका था। गांड में हल्की चुभन हुई तो मम्मी अचकचा कर थोड़ी सी उठीं, नींद में बड़बड़ाईं, “क्या है…” उनका हाथ पीछे गया और मेरे लंड पर पड़ गया। उन्होंने उसे पकड़कर पीछे ठेलने की कोशिश की, लेकिन मैं हिला नहीं, गहरी नींद का बहाना बनाकर पड़ा रहा। मम्मी ने दो-तीन बार कोशिश की, लेकिन जब मैं नहीं हिला तो उनका हाथ रुक गया। फिर उन्होंने लंड को दबाया, जैसे जांच रही हों कि ये क्या है। धीरे-धीरे सहलाने लगीं, उंगलियां लंड की लंबाई पर फेर रही थीं।

अब मम्मी का हाथ मेरे निक्कर में चला गया। उन्होंने जिप खोली, लंड बाहर निकाला और पूरी तरह हाथ में ले लिया। लंड को सहलाते हुए ऊपर-नीचे करने लगीं, अंगूठे से सुपारे पर रगड़ रही थीं। उनकी सांसें तेज हो गईं, “उफ्फ…” छोटी सी आह निकली। अब ये मेरे बस से बाहर था, लंड और सख्त हो गया, नसें फूल गईं।

मैंने झट से उनका हाथ पकड़ लिया। मम्मी चौंक गईं, हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। वो हाथ छुड़ाकर सीधी लेट गईं, आंखें खोलकर मुझे देखा, “चंदन… ये क्या कर रहे हो…” उनकी आवाज में डर और हैरानी थी। लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। झट से उनके ऊपर चढ़ गया, दोनों हाथों से उनकी बाहें दबा लीं। अचानक हमले से मम्मी डर गईं, “नहीं बेटा… ये गलत है…” लेकिन मैंने उन्हें बाहों में जकड़ लिया और होंठ उनके होंठों पर रख दिए। पहले हल्के से चूमा, फिर जीभ अंदर डालकर चूसने लगा। मम्मी पहले विरोध करती रहीं, मुंह मोड़ने की कोशिश की, लेकिन मैंने उनके गाल पकड़कर चूमना जारी रखा। धीरे-धीरे उनका विरोध कम हुआ।

मैंने एक हाथ से उनकी चूचियां मसलनी शुरू कीं – नाइटी के ऊपर से ही, निप्पल्स सख्त हो गए थे। दूसरा हाथ नाइटी के अंदर डाला, सीधे चूत पर ले गया। उंगलियां झांटों में फंस गईं, फिर दरार में फिसलाकर क्लिटोरिस रगड़ा। मम्मी सिहर उठीं, “आह… ना… बेटा…” लेकिन उनकी चूत पहले से गीली थी। मैंने उंगली अंदर डाली, अंदर-बाहर करने लगा। धीरे-धीरे मम्मी गर्म होने लगीं, छुड़ाने की हरकत बंद हो गई। उनकी सांसें तेज, “उफ्फ… आह…” अब वो मेरे साथ थोड़ी-थोड़ी हरकत करने लगीं।

फिर मम्मी ने खुद नाइटी ऊपर करके उतार फेंकी। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने थीं। बोलीं, आवाज कांपती हुई, “अगर तुमने मेरी चूत की गर्मी शांत नहीं की तो दुबारा ऐसी हरकत मत करना… समझे?” मैंने हामी भरी और उन्हें खींचकर बेड पर लिटा दिया। दोनों टांगें फैलाईं, घुटनों को मोड़कर अलग किया। उनकी चूत पूरी खुल गई – गीली, चमकदार, झांटें भीगी हुईं। मैंने मुंह सटा दिया, जीभ से दरार चाटी। पहले हल्के से, फिर जोर से क्लिटोरिस को चूसा। मम्मी सिहर उठीं, “आह… इह्ह… ओह्ह… जरा जीभ को रगड़ कर बेटा… हां… ठीक ऐसे ही… जोर से चाट… आह्ह… ह्ह्ह… इह्ह… ओह बेटा… अच्छा लग रहा है…” उनकी कमर उठ रही थी, हाथ मेरे सिर पर दबा रही थीं। मैंने जीभ अंदर डाली, चूत के अंदर चाटा, फिर क्लिटोरिस को दांतों से हल्का काटा। मम्मी चीखीं, “आह्ह… हां… ऐसे ही… मत रुकना…”

कुछ देर बाद उनकी चूत सिकुड़ने लगी, शरीर कांप उठा। “आह… ओह… मैं… झड़ रही हूं…” चूत से गर्म रस निकला, नमकीन-मीठा। मैंने सब पी लिया, जीभ से साफ किया। मजा इतना आया कि लंड और फड़फड़ा उठा।

अब मम्मी ने मुझे ऊपर खींचा। मेरा लंड हाथ में लिया, सहलाया, सुपारे पर उंगली फेरी। फिर मुंह में ले लिया। पहले सुपारा चूसा, जीभ से चाटा। फिर धीरे-धीरे पूरा मुंह में लिया, गले तक। ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… वो गले तक ले रही थीं, लार टपक रही थी। मैंने उनके बाल पकड़े, हल्के से धक्का दिया। मम्मी आंखें बंद करके चूस रही थीं, स्टाइल से लग रहा था वो माहिर हैं। करीब 10 मिनट तक चूसती रहीं, लंड चमक रहा था उनकी लार से। फिर वो पीछे हटीं, टांगें फैलाकर लेट गईं और बोलीं, “अब बस… जमकर चोद मुझे बेटा… अपनी मम्मी की चूत फाड़ दो आज…” उनकी आंखों में हवस थी, चूत गीली-गीली चमक रही थी।

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मैंने अपना मोटा लंड मम्मी की चूत की दरार पर रखा और धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया। सुपारा उनकी गीली होंठों पर फिसल रहा था, क्लिटोरिस को छू-छूकर जा रहा था। मम्मी का पूरा बदन सिहर उठा, रोमांच से उनकी कमर ऊपर उठ गई। टांगें और ज्यादा फैल गईं, घुटने बाहर की तरफ मुड़ गए। उनकी चूत और खुल गई, गर्म रस लंड पर चिपक रहा था। “आह… बेटा… अब डाल ना… क्यों इतना तड़पा रहा है… उफ्फ… जल्दी…” उनकी आवाज कांप रही थी, आंखें बंद, होंठ काट रही थीं।

मैंने लंड का सुपारा ठीक छेद पर रखा, हल्का सा दबाया। सिर्फ सुपारा अंदर गया, फिर बाहर निकाल लिया। मम्मी की चूत सिकुड़ गई, वो तड़प उठीं। “आह्ह… कुत्ते… डालेगा या नहीं… मत तड़पा… पूरी तरह डाल दे ना…” उनकी आवाज में गुस्सा और हवस दोनों थे, हाथ मेरे कंधों पर नाखून गड़ा रही थीं।

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फिर मैंने एक जोरदार झटका मारा। पूरा लंड एक ही धक्के में उनकी चूत में समा गया। मम्मी की आंखें फटीं, मुंह से चीख निकली, “आआह्ह… फाड़ेगा क्या… ओह्ह… इतना मोटा… धीरे… आह…” उनकी चूत बहुत टाइट थी, लेकिन गीली होने से लंड आसानी से अंदर चला गया। मैंने रुककर महसूस किया – उनकी चूत की दीवारें लंड को कसकर दबा रही थीं, गर्मी और नमी से लंड जल रहा था।

मैंने अनाड़ी की तरह घपाघप चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के में पूरा लंड बाहर निकालकर फिर जोर से अंदर घुसेड़ता। बेड जोर-जोर से हिल रहा था, चरमराने की आवाज आ रही थी। मम्मी चीख रही थीं, “कमीने… फाड़ेगा क्या… बूर है कोई मशीन नहीं… आह… ओह… धीरे… इह्ह… आह्ह…” लेकिन उनका विरोध सिर्फ शब्दों में था, टांगें मेरी कमर पर लिपट गईं, मुझे और गहराई में खींच रही थीं। मैं रुका नहीं, घपाघप पेलता रहा। हर धक्के पर उनकी चूत से फचर-फचर की आवाज निकल रही थी, रस चारों तरफ छिटक रहा था।

मैंने स्पीड बढ़ाई। एक हाथ से उनकी चूचियां मसल रहा था, निप्पल्स को पिंच कर रहा था। दूसरा हाथ उनकी कमर पकड़कर धक्के मार रहा था। मम्मी की सिसकारियां तेज हो गईं, “आह्ह… ह्ह… आऊ… ऊऊ… ऊउइ… उईईई… हां बेटा… ऐसे ही… जोर से… ओह्ह… चोद मुझे… अपनी मम्मी को चोद…” उनकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी, क्लिटोरिस फूला हुआ था। मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर क्लिटोरिस रगड़ा, उंगली से गोल-गोल घुमाया। मम्मी का शरीर कांप उठा, “आह… ओह… मैं… झड़ रही हूं… नहीं रुक… आआह्ह… झड़ी… ओह्ह…” उनकी चूत से गर्म रस की धार निकली, लंड पूरा गीला हो गया, पानी-पानी।

मैंने धक्के और तेज किए। उनकी चूत अब ढीली-ढीली हो गई थी, लेकिन फिर भी कसकर लंड पकड़ रही थी। “मम्मी… तुम्हारी चूत कितनी गर्म है… आह… मैं भी झड़ने वाला हूं…” कुछ और धक्कों के बाद मेरा लंड फड़का, पूरा रस उनकी चूत में उड़ेल दिया। “आह्ह… ले मम्मी… मेरा रस… पूरी तरह भर दिया…” मैं उनके ऊपर लेट गया, दोनों की सांसें तेज, पसीना बह रहा था।

मम्मी ने मेरे गाल पर हाथ फेरा, मुस्कुराईं, “पागल… इतनी जोर से… लेकिन अच्छा लगा…” उनकी आंखों में संतुष्टि थी। कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे रहे, लंड अभी भी उनकी चूत में था, धीरे-धीरे ढीला हो रहा था।

फिर मैंने उन्हें पलटा, पीछे से पकड़ा। घोड़ी बनाकर फिर से लंड घुसेड़ दिया। इस बार धीरे-धीरे शुरू किया, लेकिन जल्दी ही जोरदार धक्के मारने लगा। उनकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी, थप-थप की आवाज गूंज रही थी। “आह… पीछे से… हां… गहराई तक… ओह्ह…” मम्मी फिर सिसकारियां लेने लगीं।

उस रात मैंने चार बार उन्हें चोदा। पहली बार मिशनरी में, दूसरी बार घोड़ी बनाकर, तीसरी बार मैं नीचे लेटा और मम्मी ऊपर चढ़ीं – वो मेरे लंड पर उछल रही थीं, चूचियां हिल रही थीं। चौथी बार फिर से पीछे से, लेकिन इस बार मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे, बाल खींचे। हर बार उनकी चूत में गहराई तक घुसाया, उनकी चीखें, सिसकारियां, गालियां सुनकर और जोश आता रहा। अब तक चोद ही रहा हूं, हर रात मम्मी की चूत मेरी है।

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