Bhai behen chudai sex story, Diwali gift gaand sex story: हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम ज्योति है। एक बार फिर से लेकर आई हूं अपनी स्टोरी, आई होप कि आपको मेरी ये स्टोरी बहुत पसंद आएगी। मैं अमृतसर में रहती हूं, अभी कॉलेज थर्ड ईयर की स्टूडेंट हूं। मेरी हाइट 5 फीट 3 इंच है, मैं गोरी हूं और मेरा फिगर 34-28-36 है। मैं काफी सेक्सी हूं, ऐसा मेरी फ्रेंड्स मुझे कहती हैं।
आपने मेरी पहली स्टोरी पढ़ी होगी जिसमें मैं अपने सगे भाई से नेट फ्रेंड बनने की वजह से चुद गई थी। अगर नहीं पढ़ी तो पढ़ सकती हो। ये स्टोरी उससे आगे की घटना है।
हम घर में चार मेंबर हैं – मॉम, डैड, मैं और मेरा भाई सोनू। सोनू मेरे साथ हफ्ते में दो बार जरूर सेक्स करता है। सोनू बहुत मस्त, डैशिंग और सेक्सी बॉय है। उसका लंड गोरा, मोटा और बहुत लंबा है।
बात दीवाली वाले दिन की है, कैसे मैंने दीवाली पर अपनी गांड का होल खुलवाया। आइए देखते हैं।
दीवाली का दिन था, सब घर में खुश लग रहे थे। मेरा भाई सोनू अभी तक सो रहा था, उसका रूम मेरे साथ वाला है। मैं आज जल्दी उठ गई थी। मैं मॉम-डैड के पास गई और उन्हें दीवाली विश किया। आज सब खुश लग रहे थे। मॉम ने कहा, “आओ आज सुबह मंदिर चलते हैं, शुभ होगा।” मैंने कहा, “ठीक है, मैं तैयार होकर आती हूं।”
मैं नहाने चली गई। नहाने के बाद तैयार हुई। मैंने बेबी पिंक कलर का सूट पहना, जो एकदम टाइट था। कुरती मेरे फिगर के साथ अटैच हुई पड़ी थी। नीचे पिंक कलर का ही ब्रा पहना था। सूट काफी पतला था, जिससे मेरा ब्रा साफ नजर आ रहा था। मैंने सिर भी धोया था, इसलिए बाल खुले छोड़ दिए।
मैं नीचे गई, मॉम के पास बोली, “मॉम, मैं रेडी हूं।” तो हम मंदिर चले गए। मंदिर में सब मर्द मुझे घूर-घूर कर देख रहे थे। मैं भी सबसे नजर मिलाकर चुरा लेती। जब मैं झुकी तो पंडित को मेरा क्लिवेज दिख गया और वो जोर से “हरि ओम हरि” करने लगा। मैं तो हंस पड़ी। उसके बाद हम घर आ गए।
मैंने देखा कि मेरा भाई सोनू उठ चुका है और तैयार होकर हमारा इंतजार कर रहा है। जब मैं और मॉम उसके पास गए तो उसने मॉम को विश किया और मुझे नीचे से ऊपर तक देखकर बोला, “हैप्पी दीवाली।” मैंने सेक्सी स्माइल देकर कहा, “सेम टू यू सोनू भाई।” मॉम का मुंह दूसरी तरफ था तो उसने इशारे में कहा, “सेक्सी लग रही हो।” मैंने नजरें झुकाकर स्माइल दी।
सोनू ने मॉम से कहा, “मॉम, मुझे भूख लगी है।” मॉम ने मुझे सोनू के लिए खाना बनाने को कहा। मैं किचन में चली गई। मॉम दीवाली की तैयारियां करने लगीं। सोनू मेरे पीछे आया और मेरी गांड पर हाथ फेरने लगा। मैंने कहा, “हटो सोनू, कोई आ जाएगा।” उसने कहा, “मॉम बाहर गली में खड़ी आंटी से बात कर रही हैं।”
मैंने कहा, “भाई, मैं अभी मार्केट जा रही हूं, तुझे दीवाली पर क्या चाहिए? मैं तेरे लिए ले आऊंगी।” सोनू ने कहा, “मुझे जो चाहिए वो तो आपके पास है।” मैंने पूछा, “क्या?” उसने कहा, “ज्योति दीदी, मैं आपकी गांड को अपने लंड से स्पर्श करवाना चाहता हूं। मुझे आपकी गांड बहुत अच्छी लगती है, मैं आपकी गांड मारना चाहता हूं।”
मैंने कहा, “ये पॉसिबल नहीं है सोनू, रहने दो, मानो मेरी बात।” लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा। आखिर में मुझे हां करनी पड़ी। वो खुश हो गया। उसने मेरी गांड पर हाथ फेरा, मेरे boobs जोर से दबाए और वहां से चला गया। मैं हॉट हो चुकी थी, मेरी चूत गीली हो गई थी लेकिन मैंने खुद को कंट्रोल किया।
उसके बाद सोनू ने खाना खाया और वो अपने दोस्तों के साथ चला गया। मैं मॉम के साथ दीवाली की तैयारियां करने लगी। उसके बाद मैं सो गई। 3 बजे उठी। उस टाइम भाई भी आ चुका था। मॉम ने कुछ पैसे दिए और कहा, “जाओ कुछ कपड़े ले आओ दीवाली पर।” भाई और मैं खुश हो गए और हम चले गए।
हम मॉल गए, वहां खूब एंजॉय किया। मैंने और भाई ने कपड़े लिए। फिर हम मैकडी में गए, वहां कुछ खाया। उसके बाद हम कार्ड्स खरीदने गए। हम सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर थे। इससे ऊपर एक और फ्लोर बन रहा था, लगभग बन चुका था। शाम का टाइम था, सब लेबर जा चुके थे, वहां कोई नहीं था।
सोनू ने कहा, “और दीदी, ऊपर का फ्लोर देखकर आते हैं।” मैंने कहा, “ठीक है।” मैं समझ गई थी कि मेरा भाई कुछ करने के मूड में है। तो मैं उसके साथ चली गई। वहां कोई नहीं था। मेरे साथ सामान था। सोनू मुझे एक खंभे के पीछे ले गया और मुझे दीवार के साथ लगा कर मेरे होंठ चूसने लगा। वो ये सब बहुत तेजी से कर रहा था।
मेरे हाथों से सामान गिर गया। मैं दोनों हाथों से उसका सिर पकड़ कर उसके होंठ चूसने लगी। मैंने सूट पहना था और मेरी कुरती का गला बहुत बड़ा था। उसने मेरे boobs गले के ऊपर से ही निकाल कर दबाने लगे और चूसने लगा। मैं मजा ले रही थी, अपने boobs चुसवा रही थी। मैंने अपना हाथ उसके लंड पर सहलाने लगी।
ये सब काम जल्दी-जल्दी हो रहा था। उसके बाद भाई ने मेरी सलवार खोल दी, मेरी पैंटी नीचे कर दी और घुटनों के बल बैठ कर मेरी चूत चाटने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं मजा से पागल हो रही थी। मैं हल्की-हल्की सिसकारियां ले रही थी, “आह्ह… ओह्ह सोनू… इह्ह… चाट और जोर से…”
5 मिनट बाद मैं जोर से झड़ गई। मेरे भाई ने मेरा सारा पानी पी लिया। उसके बाद मैं घुटनों के बल बैठ गई और उसके लंड को हाथ में लेकर मुंह में समा दिया। जोर-जोर से लॉलीपॉप की तरह ऊपर-नीचे चूसने लगी। मैं लगातार चूसती रही। 5 मिनट बाद मेरे भाई का माल निकल गया और मैं उसका सारा माल पी गई।
उसके बाद हमने किसी के आने की आवाज सुनी और हम दूसरी सीढ़ियों से वहां से भाग गए और घर की तरफ चल दिए। हम घर पहुंच गए और बाहर खड़े थे। घर लाइट्स से जगमगा उठा था। भाई ने मेरे कान में कहा, “दीदी, मेरा दीवाली गिफ्ट तैयार है ना?” मैंने कहा, “तू चिंता मत कर, एकदम फ्रेश है।” वो खुश हो गया और हम अंदर चले गए।
दीवाली वाले दिन हमारे सारे रिश्तेदार हमारे घर आते हैं। घर में बहुत भीड़ हो जाती है, इसलिए किसी का कोई ध्यान नहीं रहता। मैंने इसी बात का फायदा उठाने की प्लानिंग की। मैंने भाई के सेल पर कॉल किया और कहा, “जब सब पटाखे चलाने में बिजी होंगे तो हम अपनी दीवाली मनाएंगे।” भाई ने कहा, “मॉम स्टोररूम पर ताला लगा कर रखते हैं, तो हम स्टोररूम की खिड़की से अंदर घुस कर काम करेंगे। मॉम के लॉक करने से पहले खिड़की खोल आना।”
मैंने कहा, “ठीक है।” मैं जाकर खिड़की खोल आई। सब रिश्तेदार आने शुरू हो गए। हम सब तैयार होने लगे। जब मैं तैयार होकर आई तो सब मुझे देखते ही रह गए। मैंने लाइट ग्रीन कलर की साड़ी पहनी थी, जो मेरी कमर से बहुत नीचे बंधी हुई थी। मेरा ब्लाउज बहुत छोटा था, जो boobs को कवर करता था, बाकी सब नंगा था। मैंने पल्लू को पटका किया हुआ था। मेरी बैक पर टैटू बनवाया हुआ था और बाल खुले छोड़ रखे थे। मैं किसी सेक्सी हसीना से कम नहीं लग रही थी। सब मुझे देख रहे थे।
जब सोनू ने मुझे देखा तो वो हैरान हो गया और उसका लंड खड़ा हो गया। वैसे भाई भी आज बहुत डैशिंग लग रहा था। उसने शेरवानी पहनी थी। हम भाई-बहन कम और हसबैंड-वाइफ ज्यादा लग रहे थे। सब तैयार हो चुके थे।
हम सब पूजा करने लगे। 1 घंटे बाद पूजा खत्म हुई और सब प्रसाद खाने लगे। मैंने भाई की तरफ देखकर इशारा किया। उसने जवाब दिया, “10 मिनट बाद।” उसके बाद सब बड़े अपने बच्चों के साथ पटाखे चलाने में बिजी हो गए। पापा को रिश्तेदार ड्रिंक के लिए साथ ले गए। मॉम अपनी सहेलियों में बिजी हो गई। बाकी बच्चे पटाखे चला रहे थे।
मुझे मौका ठीक लगा। मैंने भाई को मैसेज किया, “स्टोररूम में आ जाओ।” और मैं खुद स्टोररूम की पीछे वाली खिड़की से अंदर आ गई। वहां हल्की-हल्की लाइट थी और वहां हमारा पुराना सोफा पड़ा था। 5 मिनट बाद भाई भी वहां आ गया। उसने पीछे से मेरी कमर में हाथ रखते हुए कहा, “जान आज तुम कमाल लग रही हो। मेरा तो बुरा हाल हो जाता है जब मैं तुम्हें देखता हूं।”
मैंने कहा, “राजा आज मुझे जी भर के देख लो।” उसने मेरा मुंह अपनी तरफ घुमाया और अपने होंठ मेरे होंठों के करीब लाकर फ्रेंच किस करने लगा। मैं भी 100% साथ देकर उसके होंठ चूस रही थी। उसका हाथ मेरे ब्लाउज में चला गया था और वो मेरे boobs ऊपर से दबा रहा था। उसने मेरा पल्लू साइड में कर दिया और मुझे घुमा कर ब्लाउज पीछे से खोल दिया।
पीछे से मेरे boobs को दोनों हाथों में भर लिया और मेरी गर्दन पर किस करने लगा। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं सिसकारियां ले रही थी, “आह्ह… सोनू… ओह्ह… इह्ह… और जोर से…” फिर उसने धीरे-धीरे मेरी साड़ी उतारने लगा। मैं घूम-घूम कर अपनी साड़ी उतारने लगी। अब मैं उसके सामने पेटीकोट में थी।
उसने मुझे सोफे पर बिठाया और खुद नीचे बैठ गया। मेरी टांगें चौड़ी कर दीं। उसने मेरा पेटीकोट ऊपर कर दिया और उतार दिया। मैंने नीचे आज पैंटी नहीं पहनी थी क्योंकि मैं पहले से तैयार थी। फिर उसने अपना मुंह मेरी चूत पर रख दिया। मैंने जोर से सिसकारी ली। मैं जोर-जोर से सिसकारियां ले सकती थी क्योंकि बाहर पटाखों की आवाज बहुत ज्यादा थी।
वो मेरी चूत में जीभ से चाटने लगा। मैं उछल-उछल कर अपनी चूत चटवा रही थी। वो कभी जीभ देता, कभी उंगली देता। मैं पूरी मस्त हो चुकी थी। मैं टांगें खोल-खोल कर अपनी चूत मजा से चटवा रही थी। 5 मिनट बाद मेरा पानी निकल गया और भाई ने मेरा सारा पानी पी लिया।
उसके बाद मैंने भाई के कपड़े धीरे-धीरे उतारे और साथ में किस करती रही। मैंने भाई को सोफे पर बिठा दिया और उसे पूरा नंगा कर दिया। मैंने उसका लंड हाथ में लेकर मसलने लगी। उसका लंड बहुत टाइट था, एकदम लोहे की तरह। मैंने अपने कोमल हाथों से उसके लंड को सहलाया और मुंह करीब लाकर गालों पर लंड फेरने लगी।
भाई को बहुत मजा आ रहा था। वो मजा में “आआह्ह्ह… ज्योति… ओह्ह… इह्ह…” कर रहा था। मैंने उसका लंड मुंह में भर लिया और ऊपर-नीचे चूसने लगी। भाई मजा में “ओह्ह ज्योति… आआह्ह ज्योति… मार गया आह्ह…” की आवाजें निकालने लगा। मैं जोर-जोर से उसके लंड को चूसने लगी। 10 मिनट लंड चूसने के बाद अब भाई खड़ा हो गया था।
उसने कहा, “ज्योति मेरी रंडी बहन, क्या तू तैयार है अपनी गांड देने के लिए?” मैंने कहा, “हां मेरे राजा, आ जा ले मेरी गांड, पाड़ दे आज। मेरी गांड को तेरे लिए ही संभाल रखी है साले बहनचोद…”
उसने मुझे झट से घोड़ी बना दिया और अपनी एक उंगली पर वेसलीन लगाकर मेरी गांड में देने लगा। जैसे ही उसने उंगली दी तो मैंने अपनी गांड से अंदर खींच ली। भाई ने कहा, “साली बहुत शौक है गांड मरवाने का।” मैंने कहा, “राजा बस तू लंड चढ़ा दे।”
उसके बाद उसने दो उंगलियां एक साथ दीं। मुझे कुछ तकलीफ हुई लेकिन मैंने मैनेज कर लिया। उसके बाद उसने चार उंगलियां एक साथ जोर से मेरी गांड में दीं। मेरी तो चीख निकल गई, “आआआआह्ह्ह्ह… मैं तो मर गई…” भाई ने कहा, “ज्योति डोंट वरी, पहली बार ऐसा ही होता है।” मैंने कहा, “भाई आराम से, मैं तेरी बहन हूं।”
उसके बाद उसने मेरी गांड पर अपना लंड का टॉप रखा और रगड़ने लगा। मुझे बहुत सुकून मिल रहा था और मैं “आआउउ… आह्ह्ह…” कर रही थी। फिर उसने एक जोरदार झटका मारा और लंड की टॉपी मेरी गांड में डाल दी। मेरी तो दर्द से बुरा हाल हो रहा था। मैं भाई से कहने लगी, “आआह्ह… मर गई तेरी बहन… प्लीज भाई बाहर निकालो।”
लेकिन उसने मेरी एक न सुनी और एक और जोरदार शॉट मारा। मेरी हालत अब मरने को हो गई थी लेकिन उसे जरा भी रहम नहीं आया। तीसरे शॉट में उसने पूरा लंड मेरी गांड में डाल दिया। मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरी गांड फट चुकी है और मैं अधमरी जैसी हो गई थी।
फिर उसने लंड बाहर निकाला, मुझे सांस आई। भाई ने कहा, “सॉरी, मैंने ये सब इसलिए किया ताकि आगे तुझे दर्द न हो।” लेकिन मैं तो मधोश पड़ी हुई थी। 5 मिनट बाद भाई ने फिर से करना शुरू किया। अब एक झटके में लंड आराम से आधा अंदर चला गया था और मुझे दर्द भी कम हो रहा था।
भाई धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करने लगा और चोदना शुरू कर दिया। अब मेरा दर्द दूर हो चुका था और मुझे मजा आने लगा था। मैंने कहा, “भाई जोर से, अब तुम्हारी बहन को मजा आने लगा है।” उसने अपनी झटकों की स्पीड बढ़ा दी। मैं “आह्ह्ह… ओह्ह… मम्म… सोनू…” की आवाजें निकालने लगी। पटाखों की वजह से मेरी आवाजें सुनाई नहीं दे रही थीं।
वो कस-कस कर मेरी गांड मार रहा था और मैं घोड़ी बनकर आराम से मरवा रही थी। मेरे चूचे हिल रहे थे। मैं आगे-पीछे होने लगी थी और मुझे चूर हो चुकी थी। 15 मिनट लगातार चुदाई के बाद भाई ने कहा, “ज्योति मेरा निकलने वाला है।” मैंने कहा, “गांड में ही छोड़ दो।”
उसने एक जोरदार गरम-गरम पिचकारी मेरी गांड की तरफ मारी। भाई सोफे पर बैठ गया। मैंने अपनी एक उंगली अपनी गांड पर फेरी और भाई के माल को टेस्ट किया और अपनी उंगली चाट गई। मैं भी भाई के ऊपर आकर बैठ गई।
15 मिनट बाद भाई का दिल फिर से मुझे ठोकने का करने लगा। उसने मुझे सोफे पर लिटाया, 69 वाला पोज बनाया। मेरी चूत पर लंड रख कर आगे-पीछे करने लगा। मेरे लिए इससे अच्छी बात और क्या हो सकती थी? मुझे डबल मजा मिल रहा था। मैंने भाई से कहा, “क्या भाई सारी चुदाई आज ही करोगे?” उसने कहा, “दीवाली तो साल में एक बार ही आती है।”
और झटके मारने शुरू कर दिए। वो जोर-जोर से अपनी पूरी जान लगाकर झटके मार रहा था और मैं अपनी चूत उठा-उठाकर तेजी से लंड अंदर ले रही थी। 15 मिनट जोरदार झटकों के बाद मेरे भाई ने अपना लंड मेरे मुंह में देकर अपना माल छोड़ दिया और मैं उस गरम-गरम प्याले को पी गई। मुझे काफी अच्छा लगा पीकर।
फिर हम 10 मिनट ऐसे ही लेटे रहे। उसके बाद भाई को डैड की कॉल आई, “बेटा कहां हो?” तो उसने कहा, “दोस्त के साथ हूं, अभी आ रहा हूं।” भाई जाने की तैयारियां करने लगा। मैंने कपड़े से अपनी चूत साफ की और साड़ी पहनने लगी। मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा था। मेरी चाल बदल गई थी और गांड सूजन के कारण फूल गई थी। मुझे डर था कि कोई देखकर पूछ न ले, इसलिए मैंने साड़ी थोड़ी टाइट बांधी ताकि कह सकूं कि साड़ी टाइट है।
मैं आराम-आराम से चलकर स्टोररूम से बाहर चली गई और भाई भी चला गया। हम जाकर पटाखे चलाने लगे और उसके बाद सो गए।