दीदी और जीजा ने छोटी बहन को चुदाई में शामिल किया

नोएडा की सेक्टर-137 की उस हाई-राइज सोसाइटी में, जहां शाम को सूरज ढलते ही बालकनियों पर लोग चाय पीते और हल्की-हल्की बातें करते, हमारा घर था। मैं, सुमोना, 23 साल की, अभी ग्रेजुएशन खत्म करके घर पर थी। दीदी राखी, 28 की, शादी के बाद भी जिजा पंकज के साथ यहीं रहती थीं। जिजा पंकज, 30 का, एक अच्छी कंपनी में मैनेजर, बाहर से देखने में स्मार्ट और हैंडसम। पापा-मां गांव में थे, तो घर में हम तीनों ही थे – एक छोटा-सा परिवार, लेकिन अंदर से कुछ ऐसा चल रहा था जो बाहर की दुनिया से छिपा हुआ था।

शुरुआत ठीक-ठीक याद नहीं, लेकिन पहली बार जब मैंने कुछ महसूस किया, वो एक जनवरी की बहुत ठंडी रात थी। बाहर कोहरा इतना घना था कि खिड़की खोलते ही ठंड हड्डियों तक उतर जाती। मैं अपने कमरे में लेटी थी, लेकिन नींद नहीं आ रही। दीदी-जिजा का कमरा बगल में था। दीवार पतली थी, आवाजें साफ आतीं। मैंने सुना – दीदी की भारी सांसें, जिजा की गहरी आवाज। “राखी… आज बहुत जोर से… तेरी चूत कितनी गीली है…” फिर दीदी की सिसकारी, “पंकज… आह… और गहरा… फाड़ दो…” मैंने कान लगाए। दिल इतनी तेज धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर सुनाई देगा। मेरी चूत में एक अजीब सी सनसनी हुई। मैंने जांघें आपस में दबाईं, लेकिन वो चाहत बढ़ती गई। “ये क्या हो रहा है? वो मेरे दीदी-जिजा हैं…” लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। मैंने अपना हाथ नीचे सरकाया, चूत पर उंगली फेरी। गीली हो चुकी थी।

अगले दिन सुबह सब सामान्य था। ब्रेकफास्ट टेबल पर दीदी ने कहा, “सुमोना, रात को नींद आई?” मैंने झूठ बोला, “हां दी, अच्छी नींद आई।” जिजा ने मेरी तरफ देखा। उसकी आंखों में कुछ था – जैसे वो जानता हो कि मैंने सुना। शाम को जब मैं सोफे पर लेटी टीवी देख रही थी, जिजा मेरे पास आकर बैठ गया। उसकी जांघ मेरी जांघ से छू गई। “सुमोना, तू आजकल बहुत खूबसूरत लग रही है।” मैं शरमा गई। दीदी किचन से आई, “क्यों पंकज, छोटी को तंग कर रहे हो?” जिजा ने हंसकर कहा, “नहीं राखी, बस कह रहा हूं कि अब वो बड़ी हो गई है।” दीदी ने मेरी तरफ देखा, मुस्कुराई। “सुमोना… तुझे कभी बॉयफ्रेंड की याद आती है?” मैंने सिर हिलाया। दीदी ने जिजा की तरफ देखा, फिर बोली, “हम दोनों सोच रहे थे… तुझे भी थोड़ा मजा आना चाहिए।”

मेरा दिल धड़क गया। “दी… क्या मतलब?” दीदी ने मेरे पास आकर बैठ गई। उसका हाथ मेरे कंधे पर। “मतलब… हम रात को जो करते हैं, तू भी शामिल हो सकती है।” मैं चौंक गई। “दी… ये गलत है न?” जिजा ने कहा, “गलत-ठीक तो समाज तय करता है। लेकिन हम तीनों खुश रहेंगे तो क्या बुरा है?” दीदी ने मेरे गाल पर हाथ फेरा। “सुमोना… डर मत। हम तुझे कभी दुख नहीं देंगे।”

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रात हुई। हम तीनों लिविंग रूम में बैठे थे। दीदी ने लाइट्स डिम कर दीं। सिर्फ एक छोटी लैंप जल रही थी। दीदी ने कहा, “सुमोना, आज हमारे साथ सो।” मैं चुपचाप चली गई। बेड पर तीनों। बीच में मैं। कंबल के नीचे गर्माहट। जिजा का हाथ धीरे से मेरी कमर पर आ गया। मैं सिहर उठी। “जिजा…” वो बोला, “शश… बस चुप।” दीदी ने मेरी तरफ मुंह किया। उसने मेरे होंठ चूम लिए। वो किस इतना गहरा था कि मेरी सांस रुक गई। जिजा ने मेरी टी-शर्ट ऊपर की। मेरे स्तन बाहर आए। वो छोटे लेकिन सख्त थे। जिजा ने उन्हें दबाया। “सुमोना… कितने नरम हैं…” मैंने सिसकारी ली। दीदी नीचे सरकी। मेरी शॉर्ट्स उतारी। मेरी चूत पहले से गीली थी। दीदी ने जीभ लगाई। “आह… दीदी… ओह…” मैं चीख पड़ी। जिजा मेरे होंठ चूम रहा था, मेरे स्तन दबा रहा था।

धीरे-धीरे जिजा ने अपना लंड निकाला। वो मोटा, लंबा, सख्त। दीदी ने कहा, “सुमोना… इसे छू।” मैंने हाथ बढ़ाया। गर्म था, धड़क रहा था। जिजा ने मेरी उंगलियां उसके लंड पर फेराईं। “अच्छा लग रहा है?” मैंने हां में सिर हिलाया। दीदी ने कहा, “अब मुंह में ले।” मैंने झुककर मुंह में लिया। स्वाद नमकीन था, लेकिन उत्तेजक। जिजा सिसकारा, “सुमोना… तेरी जीभ कितनी गरम है…” दीदी मेरी चूत चाट रही थी। उसकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। मैं कांप रही थी।

फिर जिजा ने मुझे पीठ के बल लिटाया। दीदी ने मेरी जांघें फैलाईं। जिजा ने लंड मेरी चूत पर रगड़ा। गीली चूत पर उसका सुपारा छू रहा था। “सुमोना… तैयार है?” मैंने आंखें बंद कर लीं। वो धीरे से अंदर गया। दर्द हुआ, लेकिन साथ में एक मीठा मजा। “आह… जिजा… धीरे…” वो रुक गया, फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। दीदी मेरे स्तन चूस रही थी। मैं चीख रही थी। “दीदी… जिजा… और जोर से…” जिजा तेज हुआ। “सुमोना… तेरी चूत कितनी टाइट और गीली है… आह…” दीदी ने मेरी क्लिट पर उंगली फेरी। मैं झड़ गई। जिजा ने और जोर से धक्के मारे, फिर मेरे अंदर झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य अंदर महसूस हुआ।

लेकिन रात खत्म नहीं हुई। दीदी ने जिजा को पलटा। “अब मेरी बारी।” जिजा ने दीदी को लिया। मैं देख रही थी। दीदी की मोटी गांड हिल रही थी। जिजा धक्के मार रहा था। “राखी… तेरी चूत आज और ज्यादा गरम है…” दीदी चीख रही थी। “पंकज… जोर से… सुमोना को दिखा कि कैसे चोदते हैं…” मैंने अपना हाथ चूत पर रखा, सहलाने लगी। दीदी ने मुझे बुलाया। “सुमोना… मेरी चूत चाट।” मैंने झुककर जीभ लगाई। दीदी की चूत जिजा के लंड से चिपकी हुई थी। मैं चाटती रही। जिजा दीदी को चोद रहा था, मैं चाट रही थी। दीदी झड़ गई। “आह… दोनों… बहुत अच्छा…”

फिर हम तीनों एक-दूसरे से चिपककर लेटे। जिजा का लंड फिर सख्त हो गया। इस बार दीदी ने कहा, “सुमोना… अब तेरी गांड ट्राई करे?” मैं डर गई। “दी… दर्द होगा न?” जिजा ने कहा, “धीरे-धीरे करेंगे।” दीदी ने ऑयल लगाया। जिजा ने पहले उंगली डाली। मैं सिहर उठी। “जिजा… आह…” फिर धीरे से लंड रखा। दर्द हुआ, लेकिन धीरे-धीरे मजा आने लगा। “जिजा… अब अच्छा लग रहा है…” दीदी मेरी चूत में उंगलियां डाल रही थी। जिजा मेरी गांड चोद रहा था। मैं चीख रही थी। “आह… जिजा… दीदी… और…” हम तीनों फिर झड़े।

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उस रात के बाद हर रात यही होता। कभी जिजा मुझे चोदता, दीदी मेरी चूत चाटती। कभी दीदी को चोदता, मैं जिजा का लंड चूसती। कभी दोनों बहनों को साथ में। एक रात जिजा ने हमें दोनों को एक-दूसरे के ऊपर लिटाया। वो बारी-बारी चोदता। दीदी की चूत मेरे मुंह में, मेरी चूत दीदी के मुंह में। जिजा हम दोनों को चोदता। सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। “पंकज… चोदो… हम दोनों को फाड़ दो…” हम झड़ते रहे।

भावनाएं गहरी हो गईं। दीदी कहती, “सुमोना… तू हमारी जान है अब।” जिजा कहता, “हम तीनों बिना एक-दूसरे के अधूरे हैं।” लेकिन डर भी था। “अगर कोई पता चल गया तो? परिवार, समाज…” फिर भी हम रुक नहीं पाए। हर रात वो आग जलती। जिजा का मोटा लंड मेरी टाइट चूत में, दीदी की जीभ मेरी गांड पर, मेरी उंगलियां दीदी की चूत में। हम तीनों एक-दूसरे में खो जाते।

एक रात बाहर तेज बारिश थी। बिजली चली गई। सिर्फ मोमबत्ती की रोशनी। जिजा ने कहा, “आज कुछ स्पेशल।” उसने हमें दोनों को बांध दिया – हाथों को सिर के ऊपर। फिर धीरे-धीरे हमें चूमता, चाटता। दीदी और मैं एक-दूसरे को देखकर सिहर रही थीं। जिजा ने पहले दीदी को चोदा, फिर मुझे। हम चीख रही थीं। “जिजा… और जोर से… हमारी चूत फाड़ दो…” वो तेज-तेज धक्के मारता। हम दोनों झड़ गईं। फिर वो हम दोनों के अंदर झड़ा।

समय बीतता गया। हमारा रिश्ता सिर्फ शारीरिक नहीं रहा। प्यार था, विश्वास था, और एक गहरा बंधन। लेकिन guilt भी। मैं सोचती, “ये गलत है।” लेकिन दीदी कहती, “हम खुश हैं। यही काफी है।” जिजा कहता, “सुमोना… तू हमारे बिना जी नहीं सकती, हम भी नहीं।” नोएडा की इन ऊंची दीवारों के बीच हमारा गुप्त संसार था। जहां बाहर सब सामान्य दिखता, अंदर हम तीनों जलते रहे – चाहत की आग में, स्पर्श की गर्मी में, और उस अनकहे प्यार में जो शायद कभी खत्म न हो। कभी-कभी सोचती हूं कि ये कितने दिन चलेगा। लेकिन उस पल में, हम बस जी रहे थे। तीन शरीर, तीन दिल, एक ही चुदाई के जाल में फंसे हुए।

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