भाभी की चुदाई होटल में – मुंबई की देवर भाभी सेक्स कहानी

मुंबई की अंधेरी ईस्ट की उस 5-स्टार होटल में, जहां लॉबी की क्रिस्टल चैंडेलियर से निकलती रोशनी फर्श पर हीरे जैसी चमक बिखेरती है और एयर में महंगे परफ्यूम की महक घुली रहती है, मैंने वो रातें गुजारीं जो जिंदगी भर याद रहेंगी। मैं, राहुल, 27 साल का, दिल्ली से कंपनी की मीटिंग के लिए मुंबई आया था। कंपनी ने मुझे और मेरी भाभी प्रिया को एक ही होटल में बुक किया था – रूम 1205 और 1207, पास-पास, 12वीं फ्लोर पर। भाई रोहन दिल्ली में ही था, लेकिन प्रिया को भी एक फैमिली मैरिज फंक्शन अटेंड करने मुंबई आना पड़ा था। प्रिया, 29 की – गोरी, भरी-भराई बॉडी, लंबे सिल्की बाल, गुलाबी होंठ, और आंखें ऐसी कि एक नजर में दिल थम जाए। शादी को पांच साल हो गए थे। बाहर से सब परफेक्ट लगता – खुशहाल जोड़ा, अच्छा घर। लेकिन अंदर, एक ऐसी चाहत सुलग रही थी जो धीरे-धीरे भड़क उठी।

पहली शाम। एयरपोर्ट से होटल तक टैक्सी में हम साथ थे। प्रिया ने सफेद कुर्ता-पजामा पहना था – टाइट, पसीने से थोड़ा गीला। वो मेरे बगल में बैठी थी। उसकी जांघ मेरी जांघ से छू रही थी। हर ब्रेक पर वो हल्का सा सरकती, स्पर्श और गहरा होता। वो बोली, “राहुल, मुंबई में इतने दिनों के लिए पहली बार आए हो?” मैंने कहा, “हां भाभी, मीटिंग्स हैं। तू?” वो मुस्कुराई। “मैं फैमिली फंक्शन के लिए। रोहन नहीं आ सका। अकेली हूं।” उसकी आवाज में एक हल्की सी उदासी थी। मैंने कुछ नहीं कहा। बस उसकी आंखों में देखता रहा। वो नजरें मिलाकर मुस्कुराई।

होटल पहुंचे। चेक-इन किया। लिफ्ट में अकेले थे। वो करीब आई। उसकी सांस मेरी गर्दन पर गर्म लग रही थी। मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा। वो सिहर उठी। “राहुल… यहां?” मैंने कहा, “भाभी… बस एक पल।” लिफ्ट रुकी। हम अलग हो गए। लेकिन वो पल काफी था।

शाम को मीटिंग खत्म हुई। मैं लौटा। प्रिया का मैसेज आया – “राहुल, डिनर साथ? रूफटॉप रेस्टोरेंट में मिलते हैं।” मैंने हां कहा। रूफटॉप पर मुंबई की लाइट्स नीचे चमक रही थीं। प्रिया ने ब्लैक ड्रेस पहनी थी – डीप नेकलाइन, बैकलेस, सिल्की फैब्रिक जो उसके शरीर से चिपक रहा था। उसके स्तन की गहराई साफ दिख रही थी। वो बोली, “राहुल, आज बहुत अच्छा लग रहा है तू।” मैंने कहा, “भाभी, तू तो हमेशा स्टनिंग लगती है।” वो हंस पड़ी। वाइन ऑर्डर की। बातें शुरू हुईं – भाई की व्यस्तता, घर की बातें, और धीरे-धीरे पर्सनल। वो बोली, “राहुल… रोहन बहुत अच्छा है, लेकिन कभी-कभी लगता है कि वो मुझे पूरी तरह समझता नहीं। शारीरिक रूप से भी… दूरियां बढ़ गई हैं।” मैं चुप रहा। वो मेरे हाथ पर हाथ रख दिया। “तू समझता है न?” मैंने कहा, “हां भाभी… बहुत।”

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वाइन का असर हो रहा था। हम उठे। लिफ्ट में फिर अकेले। इस बार वो खुद मेरे करीब आई। उसने मेरी कमर पकड़ ली। मैंने उसके होंठ चूम लिए। वो जवाब देने लगी। लिफ्ट रुकी। हम 1207 में – प्रिया के रूम में। दरवाजा बंद हुआ। वो मेरे सामने खड़ी थी। मैंने उसे दीवार से सटा दिया। उसके होंठ फिर चूमे। वो किस गहरा होता गया। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मैंने उसकी ड्रेस की जिप खोली। ड्रेस नीचे। ब्रा और पैंटी में। काले लेस ब्रा में उसके गोरे स्तन। मैंने ब्रा उतारी। निप्पल सख्त, गुलाबी। मैंने उन्हें दबाया। वो सिसकारी। “आह… राहुल… जोर से… दबा… चूस…” मैंने एक निप्पल मुंह में लिया। जोर से चूसा। दांतों से हल्का काटा। वो चीख पड़ी। “आह… हां… काट… मेरे निप्पल को चूस… रस्सी बना दे… और जोर से…” मैंने दूसरे को भी वैसा ही किया। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी। “राहुल… ओह… सालों बाद किसी ने ऐसे छुआ है… चूस… और चूस…”

मैंने उसे बेड पर पटका। पैंटी उतारी। उसकी चूत – गुलाबी, पहले से गीली, रस टपक रहा। मैंने जीभ लगाई। वो कमर उठाकर चीखी। “राहुल… चाट… मेरी चूत… बहुत जल रही है… जीभ अंदर डाल…” मैंने जीभ अंदर डाली। क्लिट को चूसा। उंगलियां डालीं – दो, फिर तीन। वो कमर हिला रही थी। “आह… राहुल… उंगलियां… तेज… मेरी चूत को फाड़… जीभ से चोद… ओह… और तेज… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने स्पीड बढ़ाई। वो कांपकर झड़ गई। उसका रस मेरे मुंह में बहा। मैंने सब चाट लिया। वो बोली, “राहुल… अब तेरा नंबर।”

वो उठी। मेरी शर्ट उतारी। छाती चूमी। नीचे आई। पैंट उतारी। लंड बाहर – सख्त, मोटा, सुपारा चमक रहा। वो हाथ में लिया। “राहुल… कितना मोटा और लंबा है तेरा… रोहन से बहुत बड़ा…” वो सहलाने लगी। फिर मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगी। जीभ सुपारे पर घुमा रही थी। गले तक ले रही थी। लार टपक रही थी। मैं सिसकारा। “भाभी… बहुत अच्छा… गहरा ले… आह… तेरी जीभ जादू कर रही है… चूस… और चूस…” वो बोली, “अब डाल… मुझे तेरी जरूरत है।”

वो बेड पर लेट गई। जांघें फैलाईं। मैंने लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर। वो कराही। “आह… राहुल… बड़ा है… धीरे… पूरा अंदर ले रही हूं…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा अंदर। वो चीखी। “हां… पूरा… अब चोद… जोर से…” मैंने धक्के शुरू किए। धीरे से तेज। वो कमर हिला रही थी। “राहुल… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… चोद… आह… तेज… और तेज… मेरी चूत तेरी है…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने दबाए। वो मेरी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी। “राहुल… अंदर झड़… मुझे भर दे… गर्म वीर्य डाल… मैं तेरी हूं…” मैंने और जोर से धक्के मारे। एक साथ झड़ गए। मेरा गरम वीर्य उसकी चूत में भर गया। वो कांपकर थम गई।

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लेकिन रात खत्म नहीं हुई। वो उठी। “राहुल… आज पूरी रात।” वो मेरे ऊपर चढ़ गई। उसकी चूत मेरे लंड पर। वो कमर हिला रही थी। ऊपर-नीचे। उसके स्तन मेरे मुंह में। मैं चूस रहा था। वो चीख रही थी। “राहुल… तेरे लंड ने मुझे पागल कर दिया… आह… गहरा… और गहरा… मैं ऊपर से चोद रही हूं तुझे…” मैंने नीचे से धक्के मारे। वो तेज हो गई। “राहुल… मैं झड़ रही हूं… आह…” वो झड़ गई। मैंने उसे पलटा। डॉगी स्टाइल। उसकी गांड पकड़ी। लंड डाला। तेज-तेज। वो तकिए में मुंह दबाकर चीख रही थी। “राहुल… चोद… मेरी चूत और गांड दोनों तेरी… फाड़ दो… जोर से… मुझे तेरी रंडी बना दे… बाल पकड़… पीछे से पटक…” मैंने उसके बाल पकड़े। पीछे से जोर से धक्के। वो अपनी चूत सहला रही थी। हम कई बार झड़े।

फिर मैंने कहा, “भाभी… आज गांड में?” वो शरमा गई। “धीरे से… पहली बार…” मैंने ऑयल लगाया। पहले उंगली। वो सिहर उठी। “राहुल… आह… दर्द… लेकिन अच्छा…” फिर दो उंगलियां। वो कमर हिला रही थी। “राहुल… और अंदर… तैयारी कर रही हूं…” फिर लंड। धीरे से अंदर। वो चीखी। “आह… राहुल… बड़ा है… धीरे…” मैं रुक गया। फिर धीरे-धीरे पूरा। वो बोली, “अब चोद… मेरी गांड चोद…” मैंने धक्के शुरू किए। वो चीख रही थी। “राहुल… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… आह… बहुत मजा आ रहा है… अपनी चूत में उंगलियां डाल रही हूं…” मैं तेज हो गया। वो अपनी चूत में उंगलियां डाल रही थी। हम दोनों झड़ गए।

सुबह हुई। हम थके हुए लेटे थे। प्रिया बोली, “राहुल… ये हमारा राज रहेगा। लेकिन तू मेरी जान बन गया है।” मैंने कहा, “भाभी… मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूंगा।” वो मुस्कुराई। “अब जब भी मुंबई आएं, इसी होटल में मिलेंगे।”

समय बीतता गया। भाई को शक नहीं हुआ। लेकिन हर बार मुंबई आने पर हम इसी होटल में मिलते। रात भर चुदाई। प्रिया की चूत में मेरा लंड, उसके होंठों पर मेरी जीभ, उसके स्तनों में मेरी उंगलियां। मुंबई की इन ऊंची दीवारों के बीच हमारा गुप्त संसार था। जहां बाहर सब सामान्य, अंदर हम जलते रहे – चाहत में, प्यार में, और उस गहरे बंधन में जो शायद कभी टूटे नहीं।

 

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