सगी मौसी को चोद कर चुदाई सीखी

हॉट मास्सी सेक्स कहानी में मेरी मौसी जवान थी और मैं उनसे काफी घुला मिला था, उनके घर जाता रहता था. एक बार सर्दी में मैं उनके साथ रजाई में सो रहा था.

दोस्तो, ये मेरे जीवन की बिल्कुल सच्ची घटना है.

मेरा नाम सुखवीर है.
मैं आर्मी में जॉब करता हूँ.

उस समय मेरी उम्र 19 साल थी और मेरी सगी मास्सी सुनीता की उम्र 27 साल थी.
मेरी मास्सी की शादी हो चुकी थी और एक 3 साल का बेटा भी था.

मैं मास्सी से और मास्सी मुझसे बहुत प्यार करती थीं.

हर बार छुट्टी में मैं कम से कम 15 दिन मास्सी के पास ही रहता था.
मुझे मास्सी के साथ रहना बहुत पसंद था.

ड्यूटी पर रहते हुए भी मैं मास्सी से चिट्ठी के माध्यम से संपर्क में रहता था क्योंकि उस समय 2001 में फोन नहीं होते थे.

यह हॉट मास्सी सेक्स कहानी 2001 की है.
मैं गंगानगर में पोस्टेड था और छुट्टी पर घर आया हुआ था.

मेरी बड़ी बहन का एक एग्जाम मुरादाबाद में था और उन्हें कई दिन हॉस्टल में ही रुकना था.
इसी कारण से मेरी मम्मी ने कहा कि बहन को मुरादाबाद छोड़कर आ जाओ.

मैं बहन को मुरादाबाद छोड़ने गया.
लौटते समय मैं लेट हो गया तो मैं सीधा मास्सी के घर चला गया.
जनवरी का महीना था, ठंड बहुत ज्यादा पड़ रही थी.

मैं सुबह-सुबह 3 बजे मास्सी के घर मैनपुरी पहुंच गया.
मौसा जी और मास्सी जी सो रहे थे.

ठंड की वजह से मास्सी और मौसा जी ने मुझे अपने साथ ही सुला लिया.

सुबह 4 बजे मौसा जी उठकर जानवरों को चारा देने और दूध निकालने चले गए.
अब बिस्तर में रजाई के अन्दर मैं और मास्सी ही रह गए.

मास्सी के साथ रजाई में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
मेरे मन में मास्सी जी को लेकर पहले कोई गंदा विचार नहीं था मगर साथ में रजाई में लेटे होने से मेरे मन में कुछ गुदगुदी होने लगी.

आर्मी वालों को तो आप जानते ही हो, बिना लड़की या पत्नी के रहते हैं और युवा जीवन को अकेले बिता पाना कितना दुरूह कार्य होता है.

मेरे लंड का क्या साइज़ है, यह लिखने का कोई औचित्य मुझे समझ में नहीं आता है.
लेकिन इतना जरूर कहूँगा कि मुठ मारते रहने के कारण बहुत मोटा हो गया है.

मैं रजाई में मास्सी के और नजदीक जाने लगा. मास्सी सो रही थीं या नहीं, लेकिन बिल्कुल चुपचाप लेटी हुई थीं.

जब मैं नजदीक गया तो मास्सी जग गईं और मुझसे बोलीं- ठंड से मेरा सर दर्द कर रहा है.

मैंने अपने बैग से तुरंत झंडू बाम निकाली और मास्सी से कहा- लाओ, मैं आपको बाम लगा देता हूँ.
मास्सी ने चुपचाप हामी भर दी.

मैं उनके माथे पर झंडू बाम लगाने लगा.
उनको अच्छा लगा तो मैं उनके गले में भी बाम लगाने लगा.
मास्सी ने आंखें बंद कर लीं.

उनके गले में बाम लगाते समय मैं थोड़ा नीचे की तरफ हाथ बढ़ाया तो उनकी छाती में भी मेरा हाथ टच हो गया.
लेकिन मास्सी ने कुछ नहीं कहा और आंखें बंद रखीं.

काफी देर तक सिर और आंखें दबाने के बाद मैंने मास्सी का चेहरा देखा तो उनके चेहरे पर मुझे कुछ अलग भाव नजर आए.

मैं दोबारा से रजाई में घुस गया.
लेकिन मेरे मन में मास्सी के चेहरे का एक्सप्रेशन देखकर कुछ अजीब-सा लग रहा था.

ये सोचते-सोचते 5 बज गए.
मैं सोच रहा था कि अभी मौसा जी आ जाएंगे.

पर मास्सी ने बताया कि मौसा जी दूध निकाल कर मार्केट में एक डेयरी पर देने चले गए होंगे तो मैं उनकी तरफ से निश्चिंत हो गया था.

अब घर में मैं, मास्सी और उनका छोटा बेटा (2 साल का) ही रह गए थे.

दोस्तो, मैं खुद पर कंट्रोल नहीं कर पाया और मास्सी के बिल्कुल नजदीक चिपक गया.

जैसे ही मैं नजदीक चिपका, मास्सी ने आंखें खोल लीं और बोलीं- क्या हुआ सुखवीर? नींद नहीं आ रही?

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उनका इतना बोलते ही मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैंने अपनी एक टांग मास्सी की टांग के ऊपर रख दी और एक हाथ उनके कंधे के ऊपर से बिल्कुल उनकी छाती के ऊपर रख दिया.

मास्सी एकदम चौंक गईं और बोलीं- क्या बात है रे सुखवीर? ये क्या कर रहा है? मैं तुम्हारी सगी मास्सी हूँ तुम्हारी माँ की सगी बहन हूँ … तुम ऐसा नहीं कर सकते!
मैंने मास्सी से कहा- मास्सी, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ. मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता!
मास्सी ने कहा- ये प्यार नहीं, तुम्हारी हवस है!

जैसे ही मास्सी ने ‘हवस’ बोला, मैं तुरंत उनसे दूर हो गया और करवट बदल कर लेट गया.
बहुत देर तक हमारे बीच कोई बात नहीं हुई.

काफी देर बाद मास्सी मेरी तरफ घूमीं और बोलीं- क्या नाराज हो गए हो तुम?
मैं चुप रहा.

तो मास्सी ने मुझे पीछे से बांहों में भर लिया और बोलीं- मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन समाज में हमारा रिश्ता माँ-बेटे जैसा है, इसीलिए डरती हूँ. कहीं किसी को मालूम चल गया तो सब क्या कहेंगे? खासकर तुम्हारे मौसा जी!

जैसे ही मास्सी ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया, तो मेरा बुरा हाल हो गया.
इससे पहले कभी किसी लड़की ने मुझे बांहों में नहीं लिया था.

मैं एकदम से मास्सी से लिपट गया और उनके होंठों को किस करने लगा.
मास्सी ने भी मुझे किस किया.

मैं पूरी तरह से उत्तेजित हो गया.
मेरा लंड एकदम टाइट हो गया.

मैंने मास्सी के 36 साइज़ के दूध दोनों हाथों में पकड़ लिए और होंठों पर अपने होंठ रखकर किस करता ही जा रहा था.

सुबह के 7 बजने का समय हो गया था.

मास्सी ने कहा- छोड़ो, मुझे बहुत काम करना है, तेरे मौसा जी आते ही होंगे. खाना भी बनाना है.
मैंने कहा- मुझे एक बार चुदाई कर लेने दो!
मास्सी ने कहा- अभी नहीं, मुझे आज दिन भर का टाइम चाहिए. आज रात में करेंगे. तुम्हारे मौसा जी आज तुम्हारी नानी के घर जाने वाले हैं, तो रात में हम फ्री रहेंगे.

मैं मन मारकर रह गया.
मास्सी उठकर चली गईं.

वह सारा दिन ऐसा गया कि मास्सी ने मुझे ठंड नहीं लगने दी.
वे बार बार आकर मौका देख कर मुझसे चिपक जाती थीं और जैसे ही मैं कुछ करने को होता, तो वे मुझसे दूर हो जातीं.

मौसा जी शाम को 7 बजे नानी के घर चले गए.

मास्सी ने शाम का खाना थोड़ा लेट बनाया.
मैं शाम में अच्छे से नहाया और अपने लंड के बाल भी बहुत बड़े हो गए थे, उन्हें साफ कर लिए.

मैं रात की फुल तैयारी में था.

मास्सी ने बच्चे को अपना दूध पिला कर उसे दूसरी चारपाई पर सुला दिया.

उसके बाद वे मेरे लिए और अपने लिए खाना लेकर रूम में ही आ गईं.

मैंने खाना टेबल पर रखने को कहा और मास्सी से बोला- मास्सी, पहले मुझे आपको चोदना है.

मास्सी भी समझ गईं कि मेरा पहली बार है, मैं रुक नहीं सकता.
उन्होंने कहा- ठीक है आ जाओ.

मेरी खुशी का ठिकाना न रहा और मैं मास्सी को चूमने लगा.
मास्सी भी मेरा साथ देने लगीं.

वे बोलीं- आ जाओ मेरे ऊपर, मैं बहुत एक्साइटेड हूँ सुखवीर … मुझे चोदो!
मैंने कहा- पहले पूरे कपड़े उतारो.

मास्सी हंस कर बोलीं- सब मर्द एक जैसे ही होते हैं, बिना पूरी नंगी किए उनका काम ही नहीं चलता.

मास्सी पूरी नंगी हो गई.
मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिए.

उन्होंने मुझे एक कंडोम का पैकेट दिया और कहा- इसे लगा लो, मैं अभी बच्चा नहीं चाहती हूँ.

मैंने बोला- मुझे कंडोम लगाना नहीं आता.
मास्सी ने मेरा फुल खड़ा हुआ लंड पकड़ा और उस पर कंडोम लगाया.
फिर वे मेरे लौड़े को पकड़ कर उसे ऊपर-नीचे करने लगीं.

दोस्तो, मैं इतना ज्यादा एक्साइटेड हो गया कि 5 बार ही ऊपर-नीचे करते ही मेरा माल कंडोम में ही निकल गया.

मास्सी बोलीं- ये क्या हो गया?
मैंने कहा- मास्सी, आज तक किसी लड़की ने मेरा लंड हाथ में नहीं पकड़ा था. आज मैं अपनी सगी मास्सी को चोदने जा रहा हूँ, इसलिए मुझ पर कंट्रोल नहीं हो पाया.

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मास्सी पूरी अनुभवी थीं, वे बोलीं- कोई बात नहीं, ये नॉर्मल बात है.

उन्होंने कंडोम निकाल कर फेंक दिया और मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

उनके मुँह में लेते ही मैं सातवें आसमान पर पहुंच गया और मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया.

मास्सी बोलीं- अब जल्दी से मेरी प्यास बुझाओ सुखवीर … मैं बहुत गर्म हूँ.

मैंने उनकी चुत देखी तो मेरी आंखें फट रही थीं.
चुत पर छोटे-छोटे बाल थे, जैसे 2-3 दिन पहले ही साफ किए हों.

मैंने मास्सी से कहा- जो करना है आप ही करो, मुझे कुछ मालूम नहीं है. मेरा पहली बार है, आप मुझे चोदना भी सिखा दो.

मास्सी ने अपनी दोनों टांगें खोलकर मुझे अपने नंगे बदन के ऊपर खींच लिया.

मेरे फुल खड़े लंड को पकड़ कर बोलीं- धीरे करना सुखवीर, तुम्हारा लंड मौसा जी के लंड से मोटा है, तो जल्दबाजी में मेरी चुत फट जाएगी.

उन्होंने मेरे लंड का टोपा चुत के मुँह पर रखकर कहा- अब मारो धक्का!
मैंने धक्का लगाया.
चुत पानी से चिकनी थी; पूरा लंड एक साथ ही अन्दर चला गया और मास्सी की बच्चेदानी में जा टकराया.

मास्सी की चीख निकल गई और बोलीं- मार दिया साले सुखवीर … मैंने बोला था न धीरे से करना!

उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े.

मैं डर गया लेकिन मास्सी बोलीं- थोड़ी देर ऐसे ही रहो, मेरे दूध पीते रहो!
मैंने वैसा ही किया.

उनके मम्मों से दूध निकल रहा था, तो मुझे मजा आने लगा.

थोड़ी देर में ही मास्सी ने नीचे से कमर हिलाना शुरू कर दिया.
मैं समझ गया कि अब मामला ठीक है.

मैंने अपनी कमर को आगे-पीछे करके मास्सी की चुदाई शुरू कर दी.

मास्सी की सिसकारियां तेज होने लगीं.
उन्होंने दोनों टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया और मेरी गांड के ऊपर हाथ फिराने लगीं.

वे वासना से बोलीं- आह सुखवीर … चोदो राजा … आज तो तुमने जन्नत का सुख दे दिया आहह … और जोर से …

दोस्तो, मेरी गाड़ी 100 की स्पीड में चल रही थी और मास्सी चिल्ला रही थीं.
एकदम से उन्होंने मुझे जकड़ लिया.

मैं समझ गया कि मास्सी झड़ गई हैं.

मैं अभी तुरंत नहीं झड़ा था तो मेरा थोड़ा समय बाकी था.
मैंने स्पीड और थोड़ा बढ़ाई.

मास्सी फिर से जोश में आकर मुझे और जोर से चोदने को बोलने लगीं.

मैंने 15-20 धक्के फुल स्पीड में लगाए और मास्सी की चुत में ही गहराई में झड़कर उनके ऊपर ही पड़ गया.

मास्सी और मेरी सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं.
मास्सी दोनों हाथों से मेरी पीठ सहला रही थीं.

हॉट मास्सी सेक्स के थोड़ी देर बाद मैंने अपनी लंड मास्सी की चुत से बाहर निकाला तो मेरा लंड का पानी और मास्सी की चुत का पानी मिक्स होकर बाहर निकल रहा था.
मास्सी ने अपने पेटीकोट से चुत को साफ किया.

अब हम दोनों को भूख लग आई थी.
हम दोनों नंगे ही बैठकर एक-दूसरे को खाना खिलाने लगे.

खाना खाते वक्त ही मास्सी ने कहा- सुखवीर मैं न जाने कबसे तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती थी लेकिन हमारा रिश्ता कुछ ऐसा था कि कह ही नहीं पाई.
मैंने कहा- मास्सी मुझे आपके साथ सेक्स करने में बहुत अच्छा लगा लेकिन यह सच है कि मैंने आपको कभी चुदाई की नजर से नहीं देखा था.

मास्सी मुस्कुरा दीं और बोलीं- अब क्या इरादा है?
मैंने कहा- अब तो आपको पूरी रात चोदूंगा.

वे हंस पड़ीं और हम दोनों खाना खाने के बाद अगली चुदाई की तैयारी करने लगे.

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