सुहागरात में जीजा ने साली को भी चोदा, बीवी के साथ

रेशमी की साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं। कमरे में एसी की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन तीनों के बीच की गर्मी कम नहीं हो रही थी। बाहर बारिश अब धीमी पड़ चुकी थी, सिर्फ़ छत पर टप-टप की आवाज़ बची थी। प्रिया करवट लेकर सोई हुई थी, उसकी साड़ी थोड़ी सरकी हुई, और चेहरा शांत। लेकिन रेशमी और दिव्यांश की आँखें एक-दूसरे में टिकी हुई थीं। अभी-अभी जो हुआ था, वो न तो सपना था, न ही कोई भूल। वो सच था, और अब उस सच को छुपाना मुश्किल हो रहा था।

दिव्यांश धीरे से उठा। उसने रेशमी की तरफ़ देखा। रेशमी की आँखें लाल थीं, लेकिन उसमें डर कम और एक अजीब-सी तृप्ति ज़्यादा थी। वो बिस्तर पर ही बैठ गई, घुटनों पर सिर टिकाकर। उसकी साड़ी अब पूरी तरह से खुल चुकी थी, सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट बचा था। दिव्यांश ने अपनी शर्ट फिर से पहनी, लेकिन बटन नहीं लगाए। वो प्रिया के पास गया, उसके माथे पर हाथ फेरा। प्रिया हल्के से करवट बदली, लेकिन आँखें नहीं खोलीं।

“रेशमी,” दिव्यांश ने बहुत धीरे से कहा, “तुम ठीक हो?”

रेशमी ने सिर उठाया। “जीजा जी… मैं… मैं डर रही हूँ। लेकिन साथ ही… मुझे अच्छा भी लग रहा है। बहुत अच्छा।”

दिव्यांश ने एक गहरी साँस ली। “ये सब… ये गलत है। हमने जो किया, वो कभी नहीं होना चाहिए था।”

“तो क्यों किया?” रेशमी की आवाज़ में अब थोड़ी नाराज़गी थी। “क्यों आपने मुझे रोका नहीं? क्यों मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए? क्यों मेरी चूत में अपना लुंड डाला?”

दिव्यांश चुप हो गया। उसका मन दो हिस्सों में बँट रहा था। एक तरफ़ प्रिया, जिससे शादी हुई थी, जिसके साथ सुहागरात का पहला रात होना था। दूसरी तरफ़ रेशमी, जिसकी आँखों में सालों से वो आग जल रही थी, जो आज भड़क उठी।

रेशमी उठी। उसने धीरे से दिव्यांश के पास आकर उसकी छाती पर हाथ रखा। “जीजा जी, आज रात को भूल जाइए कि मैं आपकी साली हूँ। बस इतना समझ लीजिए कि मैं एक औरत हूँ, जो आपको चाहती है। बहुत चाहती है।”

दिव्यांश ने उसका हाथ पकड़ा। “और प्रिया?”

“प्रिया दीदी सो रही हैं। और अगर वो जाग भी जाएँ, तो… शायद वो समझ जाएँ।” रेशमी ने मुस्कुराकर कहा, लेकिन उसकी मुस्कान में डर भी था।

दिव्यांश ने प्रिया की तरफ़ फिर देखा। प्रिया की साँसें अब गहरी और नियमित हो चुकी थीं। वो गहरी नींद में थी। शायद थकान, शायद शराब का हल्का नशा, शायद दोनों।

See also  दारू पार्टी में चुदाई पार्टी हो गयी

रेशमी ने दिव्यांश की शर्ट के बटन खोल दिए। उसकी उंगलियाँ उसकी छाती पर फिरने लगीं। “आपकी त्वचा कितनी गर्म है,” वो फुसफुसाई। “मुझे लगता है जैसे मैं जल रही हूँ।”

दिव्यांश अब और नहीं रोक पाया। उसने रेशमी को अपनी बाहों में खींच लिया। दोनों फिर से बिस्तर पर लेट गए, लेकिन इस बार प्रिया के बिलकुल पास। रेशमी की पीठ प्रिया की तरफ़ थी। दिव्यांश ने रेशमी की ब्लाउज़ की हुक खोली। उसके स्तन बाहर आ गए, निप्पल्स सख्त। दिव्यांश ने उन्हें मुँह में लिया। रेशमी ने अपनी मुट्ठी मुँह में दबा ली, ताकि आवाज़ न निकले। लेकिन उसकी सिसकियाँ रुक नहीं रही थीं।

“जीजा जी… चूसिए… जोर से…” वो धीरे-धीरे कह रही थी।

दिव्यांश का हाथ नीचे सरक गया। रेशमी की चूत अभी भी गीली थी, उसमें उसका ही रस था। उसने उंगली अंदर डाली। रेशमी का शरीर काँप उठा। “आह… और… और अंदर…”

प्रिया हल्के से हिली। दोनों रुक गए। दिल की धड़कनें तेज़। प्रिया ने आँखें खोलीं।

“क्या हुआ?” प्रिया ने नींद में पूछा।

दिव्यांश ने जल्दी से कहा, “कुछ नहीं… बस रेशमी यहाँ सो गई थी। डर रही थी अकेले।”

प्रिया ने आँखें मलीं। “रेशमी? तू यहाँ?”

रेशमी ने कंबल अपनी तरफ़ खींच लिया। “हाँ दीदी… मुझे नींद नहीं आ रही थी।”

प्रिया ने हल्के से हँसा। “अच्छा… ठीक है। लेकिन अब सो जा।”

प्रिया फिर से करवट लेकर सो गई। लेकिन इस बार उसकी आँखें पूरी तरह बंद नहीं हुईं। वो आधी नींद में थी, लेकिन कुछ समझ रही थी।

दिव्यांश और रेशमी एक-दूसरे को देख रहे थे। रेशमी ने धीरे से दिव्यांश का हाथ अपनी चूत पर रख दिया। दिव्यांश ने उंगली फिर से अंदर डाली। रेशमी की आँखें बंद हो गईं। वो धीरे-धीरे कमर हिला रही थी।

प्रिया ने अचानक कहा, “तुम दोनों क्या कर रहे हो?”

दोनों चौंक गए।

प्रिया ने आँखें खोलीं। “मैं सो नहीं रही हूँ। मैं सब देख रही हूँ।”

रेशमी का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। “दीदी… मैं… सॉरी…”

प्रिया ने रेशमी का हाथ पकड़ा। “चुप।”

फिर प्रिया ने दिव्यांश की तरफ़ देखा। “तुम्हें पता है, मैंने शादी से पहले ही समझ लिया था कि रेशमी तुम्हें देखती है। मैंने सोचा था, शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन आज… आज मैं देख रही हूँ कि कुछ ठीक नहीं हुआ।”

दिव्यांश चुप था।

प्रिया ने कहा, “रेशमी, तू मेरी छोटी बहन है। मैं तुझे कभी दुख नहीं पहुँचाना चाहती। लेकिन अगर ये तुम दोनों की खुशी है… तो मैं क्या कर सकती हूँ?”

See also  देवर ने वो दिया जो पति ने नहीं दिया

रेशमी रो पड़ी। “दीदी… मैंने कभी नहीं चाहा कि ऐसा हो। लेकिन जीजा जी… वो…”

प्रिया ने रेशमी को गले लगाया। “शश्श… मैं समझ रही हूँ।”

फिर प्रिया ने दिव्यांश की तरफ़ देखा। “आज रात… सिर्फ़ आज रात। कल से सब वैसा ही रहेगा जैसा होना चाहिए। लेकिन आज… मुझे भी शामिल होने दो।”

दिव्यांश स्तब्ध रह गया।

प्रिया ने अपनी साड़ी उतारी। उसका शरीर भी नंगा हो गया। वो रेशमी के पास आई। दोनों बहनें एक-दूसरे को देख रही थीं। प्रिया ने रेशमी के होंठ चूम लिए। रेशमी हैरान थी, लेकिन उसने जवाब दिया।

दिव्यांश देखता रहा। उसका लुंड फिर से खड़ा हो गया।

प्रिया ने कहा, “आओ जीजा जी… दोनों को साथ में चोदो।”

दिव्यांश ने दोनों को बिस्तर पर लिटाया। पहले प्रिया की चूत में घुसा। प्रिया की आह निकली। “आह… दिव्यांश… जोर से…”

फिर रेशमी की तरफ़ मुड़ा। रेशमी ने टाँगें फैला दीं। दिव्यांश ने उसमें भी घुसा। रेशमी चीखी, लेकिन मज़े से।

फिर दोनों बहनों को एक साथ लिया। प्रिया रेशमी के स्तन चूस रही थी, रेशमी प्रिया की चूत सहला रही थी। दिव्यांश दोनों के बीच था।

रात भर चलता रहा। कभी दिव्यांश प्रिया को पीछे से लेता, रेशमी सामने से उसका लुंड चूसती। कभी रेशमी को गोद में उठाकर चोदता, प्रिया नीचे से उसकी गाँड चाटती।

सुबह होने से पहले तीनों थककर लेट गए। प्रिया ने रेशमी को गले लगाया। “कल से सब सामान्य। लेकिन याद रहेगा।”

रेशमी ने सिर हिलाया। “हाँ दीदी।”

दिव्यांश चुपचाप छत देख रहा था। बाहर अब बारिश रुक चुकी थी। सुबह की पहली किरण खिड़की से आ रही थी।

कुछ महीनों बाद घर में सब वैसा ही था। लेकिन रिश्ते बदल चुके थे। रेशमी अब दिव्यांश को देखकर मुस्कुराती, लेकिन चुपचाप। प्रिया कभी-कभी रात में दिव्यांश से कहती, “रेशमी आज अकेली है। जाओ ना उसके कमरे में।”

और दिव्यांश जाता। लेकिन अब वो छुपकर नहीं। सब जानते थे। और सब चुप थे। क्योंकि परिवार में कभी-कभी रिश्ते शब्दों से बड़े हो जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *