साले की बीवी को रात भर रगड़ा

Sale ki biwi sex story: रात की ठंडी हवा दिल्ली की उस पुरानी हवेली में घुस रही थी जहां परिवार की सारी रौनक एक छत के नीचे सिमटी हुई थी।

ठंडी हवा की लहरें खिड़की के पुराने झरोखों से अंदर घुसकर कमरे की दीवारों को छू रही थीं। हवा में बर्फीली सर्दी का तीखा एहसास था जो चमड़ी को चुभता हुआ लग रहा था। पुरानी हवेली की लकड़ी की छत और मोटी दीवारें ठंड को अंदर पकड़े रखे थीं। पूरे परिवार की खुशियां और शोर-शराबा एक ही छत के नीचे समेटे हुए थे लेकिन अंदर का माहौल भारी और ठंडा था।

चन्दन उस रात सो नहीं पा रहा था। उसके शरीर पर कंबल के बावजूद ठंड की सिहरन दौड़ रही थी। उसका मन बेचैन था जैसे कोई अनजानी आग उसके सीने में सुलग रही हो। दिल की धड़कन तेज थी और सांसें भारी हो रही थीं। वह करवटें बदलता रहा लेकिन नींद दूर भागती जा रही थी।

वह अपनी पत्नी के भाई की शादी में आया था लेकिन अब यहां रुकना मजबूरी बन गई थी। बर्फीली सर्दी की वजह से ट्रेनें रद्द हो गई थीं और घर वापस जाना नामुमकिन था। बाहर बर्फ जैसी ठंड हवा बह रही थी जिसकी वजह से सड़कें सुनसान थीं। चन्दन को मजबूरन इसी पुरानी हवेली में रुकना पड़ा था।

हवेली का वो पुराना कमरा जहां वह अकेला लेटा था दीवारों से ठंडक चिपक रही थी। लकड़ी के बिस्तर पर लेटे हुए उसे दीवारों से निकलती नमी और पुरानी गंध महसूस हो रही थी। कमरे में मंद रोशनी एक छोटे बल्ब से आ रही थी जो छाया को और लंबा बना रही थी। उसके शरीर के हर हिस्से में सर्दी उतर रही थी लेकिन मन में एक अलग तरह की गर्मी उभर रही थी।

बाहर बरामदे में हल्की हल्की बातें सुनाई दे रही थीं लेकिन चन्दन का ध्यान कहीं और था सारिका पर।

सारिका उसके साले की बीवी थी। वह पहली बार मिली थी शादी में लेकिन उसकी आंखों में वो चमक वो मुस्कान चन्दन को अंदर तक हिला गई थी। उसकी हंसी की आवाज अभी भी उसके कानों में गूंज रही थी। गोरी चिट्टी त्वचा पर हल्की लाली थी जो ठंड में और निखर आई थी। वह करीब तीस साल की होगी। लंबे काले बाल उसकी कमर तक लहराते थे और हर हिलने पर उनकी महक हवा में फैल जाती थी।

उसकी साड़ी उसके बदन पर ऐसे लिपटी रहती थी जैसे कोई गुप्त राज छिपा रही हो। साड़ी का पल्लू उसके भरे हुए वक्षों पर ढीला पड़ता तो चन्दन की नजरें वहां अटक जाती थीं। उसकी कमर पतली थी और नितंबों की गोलाई साड़ी के नीचे साफ झलकती थी। हर कदम पर उसके शरीर की लहरें चन्दन के मन में तूफान पैदा कर जाती थीं।

चन्दन ने खुद को कई बार रोका था लेकिन उसकी नजरें बार बार उस पर ठहर जाती थीं। वह बार-बार आंखें बंद करके खुद को समझाता कि यह गलत है। यह गलत है वह सोचता वह मेरी साली की तरह है परिवार की इज्जत का सवाल है। लेकिन दिल कहां मानता है। उसके शरीर में एक अनजानी उत्तेजना जाग रही थी जो ठंड को भी भुला रही थी।

रात गहराती जा रही थी और ठंड बढ़ती जा रही थी। हवा की सनसनाहट बाहर बढ़ती जा रही थी। चन्दन ने कंबल ओढ़ा लेकिन नींद नहीं आ रही थी। उसके विचार बार-बार सारिका के चेहरे पर लौट आते थे। उसकी मुस्कान, उसकी आंखों की चमक और बदन की वो आकर्षक आकृति उसे बेचैन किए हुए थी।

अचानक दरवाजे पर हल्की खटखटाहट हुई।

कौन चन्दन ने धीमी आवाज में पूछा दिल की धड़कन तेज हो गई।

उसकी आवाज कांप रही थी। दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि उसे लगा कमरे की दीवारें भी सुन रही होंगी। ठंडी हवा अभी भी कमरे में घुस रही थी और उसकी गरदन पर सिहरन पैदा कर रही थी।

जीजू मैं सारिका आवाज आई नरम और थोड़ी कांपती हुई।

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चन्दन उठ बैठा। उसने जल्दी से दरवाजा खोला तो सारिका वहां खड़ी थी। उसने शॉल को अपने बदन के चारों ओर कसकर लपेट रखा था। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी लेकिन आंखों में कुछ अनकहा भाव था जो चन्दन को अंदर तक छू गया। उसकी आंखें नम थीं और ठंड से गालों पर हल्की लाली छाई हुई थी।

क्या हुआ इतनी रात को चन्दन ने पूछा अपनी आवाज को संभालते हुए।

जीजू मुझे नींद नहीं आ रही घर में सब सो गए हैं लेकिन ठंड बहुत है क्या मैं थोड़ी देर यहां बैठ सकती हूं बातें करेंगे सारिका ने कहा उसकी आंखें नीची थीं लेकिन चन्दन को लगा जैसे वो आंखें कुछ और कह रही हों। उसकी आवाज में एक हल्का कंपन था जो ठंड और कुछ और कारणों से आ रहा था। वह हिचकिचाया लेकिन आओ कहकर दरवाजा पूरी तरह खोल दिया।

कमरे में हल्की रोशनी थी एक छोटा लैंप जल रहा था।

सारिका अंदर आई। उसने धीरे से दरवाजा बंद किया और बिस्तर के किनारे बैठ गई। चन्दन भी उसके पास बैठ गया लेकिन दूरी बनाए रखी। कमरा छोटा था। पुरानी दीवारें नमी से भरी हुई थीं और लकड़ी का फर्श ठंड से चरमरा रहा था। बाहर से कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी लेकिन अंदर सन्नाटा छाया हुआ था।

सारिका ने शॉल कसकर लपेटा। जीजू आपकी शादी को कितने साल हो गए उसने पूछा बात शुरू करने के लिए।

चन्दन ने जवाब दिया लेकिन उसका मन कहीं और था। सारिका की खुशबू वो हल्की सी परफ्यूम की महक कमरे में फैल रही थी। वह सोच रहा था कितनी खूबसूरत है ये। उसके होंठ इतने नरम और गुलाबी लगते हैं। लेकिन वह खुद को कोसता रहा। चन्दन यह तेरे साले की बीवी है रिश्ते की मर्यादा रख।

बातें चलती रहीं परिवार की शादी की दिल्ली की सर्दी की। लेकिन धीरे धीरे बातें व्यक्तिगत होने लगीं।

सारिका ने कहा जीजू आपकी पत्नी कितनी लकी हैं आप इतने हैंडसम हैं केयरिंग।

चन्दन हंस दिया लेकिन अंदर एक लहर उठी। तुम भी तो बहुत सुंदर हो सारिका तुम्हारा पति सौभाग्यशाली है उसने कहा और नजरें मिलीं। वो पल वो नजरें टकराने का पल जैसे समय रुक गया। सारिका की सांसें तेज हो गईं। चन्दन को लगा उसके दिल की धड़कन सुनाई दे रही है। वह करीब सरक गई अनजाने में।

चन्दन का हाथ उसके हाथ से छू गया और दोनों ठहर गए।

उस स्पर्श में बिजली सी दौड़ गई। सारिका की उंगलियां ठंडी लेकिन मुलायम थीं। चन्दन का हाथ भी कांप उठा। दोनों की नजरें एक दूसरे में गड़ी रहीं।

जीजू मुझे ठंड लग रही है सारिका ने धीरे से कहा उसकी आवाज में एक कंपन था।

चन्दन ने अपना कंबल उसके कंधों पर डाला लेकिन उसका हाथ उसके कंधे पर रुक गया। सारिका ने आंखें बंद कर लीं जैसे वो स्पर्श उसे अच्छा लग रहा हो। उसकी सांसें भारी हो गई थीं। चन्दन का मन उथल पुथल था। यह गलत है लेकिन इतना अच्छा क्यों लग रहा है वह सोचता।

धीरे से उसने अपना हाथ हटाया लेकिन सारिका ने पकड़ लिया। रहने दो जीजू गर्माहट अच्छी लग रही है उसने कहा और चन्दन के करीब आ गई।

अब उनके बदन छू रहे थे कमरे की ठंड में वो गर्माहट जैसे आग की तरह फैल रही थी।

रात और गहरा गई बातें कम हो गईं लेकिन सांसें तेज।

ठंडी हवा अब भी खिड़की से अंदर आ रही थी लेकिन कमरे का माहौल गर्म होता जा रहा था। चन्दन ने सारिका की आंखों में गहरी नजर डाली। वो आंखें अब शर्म से नहीं बल्कि गहरी इच्छा से भरी हुई थीं। उनकी चमक चन्दन के अंदर आग जला रही थी।

सारिका हमें नहीं करना चाहिए चन्दन ने कहा लेकिन उसकी आवाज कमजोर थी।

सारिका ने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया। जीजू बस थोड़ी देर कोई नहीं जानता उसकी सांसें उसके गले पर गर्म गर्म लग रही थीं। चन्दन का पूरा शरीर सुलग उठा। उसकी गरदन पर सारिका की गर्म सांसें पड़ रही थीं जो उसे और उत्तेजित कर रही थीं। वह जानता था यह रिश्ते की सीमा लांघना है लेकिन वो आकर्षण वो चाहत उसे रोक नहीं पा रही थी।

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धीरे से उसने सारिका के चेहरे को ऊपर किया और उनके होंठ करीब आए। पहला चुंबन हल्का सा लेकिन जैसे बिजली दौड़ गई। सारिका की आह निकली और वो और करीब आ गई।

कमरे में अब केवल उनकी सांसों की तेज आवाज थी। चन्दन ने सारिका को अपनी मजबूत बाहों में कसकर लिया। उसकी साड़ी का पल्लू सरक गया और उसके भरे हुए वक्ष उजागर हो गए। उसका बदन इतना नरम इतना गर्म था कि चन्दन का लंड तुरंत सख्त हो गया।

जीजू मुझे आपकी जरूरत है सारिका ने फुसफुसाया।

चन्दन का मन अब नहीं मान रहा था। उसने सारिका के होंठों को गहराई से चूमा जैसे सालों की प्यास बुझा रहा हो। उनकी जीभें एक दूसरे से उलझ गईं। सारिका के हाथ उसके सीने पर घूमने लगे। उसने चन्दन की शर्ट के बटन एक एक करके खोले और उसके चौड़े सीने को सहलाने लगी।

चन्दन ने उसके ब्लाउज को छुआ। वो नरम उभार जो सांसों के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे उसे पागल कर रहे थे। सारिका तुम्हारी चूची कितनी मुलायम है आह चन्दन ने कहा और सारिका शर्मा गई लेकिन और करीब आ गई।

वे अब बिस्तर पर थे कंबल के नीचे। चन्दन ने सारिका की साड़ी उतारी धीरे धीरे हर पल को महसूस करते हुए। उसकी उंगलियां सारिका की जांघों पर घूम रही थीं। पेटीकोट खोलते ही उसकी गोरी जांघें और गीली चूत सामने आई। सारिका की आंखें बंद थीं लेकिन उसके होंठ मुस्करा रहे थे।

जीजू छुओ मुझे आह उसने कहा।

चन्दन का हाथ उसकी चूत पर गया। वो पूरी तरह गीली और गर्म थी। उसकी उंगलियां धीरे से उसकी फूली हुई चूत की लिप्स को सहलाने लगीं। तुम्हारी चूत कितनी गर्म और गीली है सारिका आह चन्दन ने कहा और अपनी उंगली अंदर डालकर हिलाने लगा। सारिका की सिसकारी निकली। आह जीजू और जोर से।

वो उसके लंड को छू रही थी जो अब पूरी तरह सख्त और मोटा हो चुका था। आपका लंड इतना बड़ा और गर्म है आह उसने कहा और उसे अपनी उंगलियों से सहलाने लगी।

तनाव बढ़ता जा रहा था। चन्दन ने सारिका को नीचे लिटाया और उसके ऊपर आ गया। उनका बदन एक दूसरे से चिपक रहा था पसीने से तर।

सारिका मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं चन्दन ने कहा।

सारिका ने हां में सिर हिलाया। हां जीजू चोदो मुझे आह मुझे अपनी बनाओ।

चन्दन ने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे से दबाया। सारिका की चीख निकली लेकिन वो खुशी की थी। आह कितना मोटा है आपका लंड जीजू धीरे। धीरे धीरे पूरा लंड उसकी गर्म चूत में घुस गया। वे अब एक लय में थे। चन्दन अंदर बाहर कर रहा था और सारिका की गांड को दोनों हाथों से पकड़कर जोर से दबा रहा था।

तुम्हारी गांड कितनी गोल और मुलायम है आह चन्दन ने कहा।

रात भर ये सिलसिला चला कभी धीरे कभी तेज। सारिका की सिसकारियां और चन्दन की आहें कमरे में गूंज रही थीं। आह जीजू और तेज चोदो मुझे। हां सारिका तुम्हारी चूत कितनी टाइट है। उनके शरीर पसीने से भीग गए थे।

सुबह होने से पहले वे थककर लेटे थे। सारिका चन्दन के सीने पर सिर रखकर लेटी थी।

जीजू यह रात कभी भूलूंगी नहीं उसने कहा।

चन्दन ने उसे चूमा लेकिन मन में अपराध बोध था। हमने गलत किया लेकिन इतना सही लगा वे जानते थे यह गुप्त रहेगा परिवार की मर्यादा बनी रहेगी लेकिन वो रात वो चाहत हमेशा याद रहेगी।

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