Bhabhi forced sex story: मेरा नाम राहुल है। उम्र बाईस साल। मैं दिल्ली के एक अच्छे कॉलेज में बी.कॉम फाइनल ईयर का छात्र हूँ।
मेरे बड़े भाई अजय की शादी को तीन साल हो चुके हैं। उनकी पत्नी यानी मेरी भाभी सिमरन इस घर की सबसे आकर्षक औरत हैं।
सिमरन भाभी की उम्र अट्ठाईस साल है लेकिन उनकी हसीन अदाओं को देखकर कोई भी उन्हें पच्चीस से ज्यादा नहीं कह सकता।
लंबे काले घने बाल गोरी चिकनी त्वचा गहरी कजरारी आँखें भरी भरी चूचियाँ जो हर साड़ी या कुर्ते में उभरकर आती हैं पतली कमर और पीछे से देखते ही दिल धड़कने लगे वाली गोल मटोल गांड।
जब वो चलती हैं तो उनका बदन लहराता है और जब वो मुस्कुराती हैं तो उनके गालों पर छोटे छोटे गड्ढे पड़ जाते हैं।
भैया अजय एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर मैनेजर हैं। उनका काम ऐसा है कि हफ्ते में चार पाँच दिन वो बाहर रहते हैं कभी मुंबई कभी बैंगलोर कभी हैदराबाद।
घर में ज्यादातर समय सिर्फ मैं और भाभी ही रहते हैं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था।
भाभी मुझे बहुत प्यार से राहुल बेटा कहकर बुलाती थीं अच्छा खाना बनाती थीं मेरी पढ़ाई का ध्यान रखती थीं।
लेकिन पिछले छह सात महीनों से उनका व्यवहार अचानक बदल गया था।
अब वो मेरे पास ज्यादा से ज्यादा बैठने लगी थीं। टीवी देखते समय मेरे कंधे पर सिर रख देतीं कभी मेरे बालों में हाथ फेरतीं कभी बात करते समय मेरी जाँघ पर हाथ रख देतीं।
मैं समझ गया था कि भाभी में कुछ बदलाव आ रहा है लेकिन मैं चुप रहता था। वो मेरी भाभी थीं भाई की बीवी। सोच सोचकर मैं खुद को रोक लेता था।
उस दिन शनिवार था। भैया सुबह सात बजे ही मुंबई के लिए फ्लाइट पकड़ चुके थे। उन्होंने कहा था कि वो रात दस बजे के बाद लौटेंगे।
घर में सिर्फ मैं और भाभी थे। मैं लिविंग रूम के सोफे पर लेटा हुआ मोबाइल पर क्रिकेट मैच देख रहा था।
भाभी रसोई से निकलकर आईं।
उन्होंने हल्की क्रीम कलर की साड़ी पहनी हुई थी। साड़ी का ब्लाउज काफी टाइट था, जिसकी वजह से उनकी भारी चूचियाँ साफ उभरी हुई थीं।
पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनकी नाभि और पेट की गोरी चिकनी त्वचा झाँक रही थी।
“राहुल, मेरे पैर बहुत दर्द कर रहे हैं बेटा,” भाभी ने नरम और थोड़ी शरमाती हुई आवाज में कहा। “पूरे दिन खड़ी-खड़ी काम किया है। थोड़ा मालिश कर दोगे?”
मैं चौंक गया।
“भाभी, मैं कैसे करूँगा?”
“अरे पागल लड़के, बस पैर ही तो हैं। तू मेरा छोटा देवर है, भाई जैसा। शर्मा क्यों रहा है?”
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा और सोफे पर आराम से लेट गईं।
अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर सरकाकर उन्होंने दोनों पैर मेरी तरफ फैला दिए। उनकी पतली पिंडलियाँ और गोरी जाँघें आधी नंगी हो गईं।
मैं हिचकिचाते हुए उनके पैरों के पास बैठ गया। उनके पैर मेरे हाथों में थे – नरम, मुलायम और हल्की-हल्की महक वाली।
मैंने धीरे-धीरे उनकी पिंडलियों की मालिश शुरू कर दी।
भाभी आँखें बंद करके लेटी रहीं और हल्की सिसकारियाँ निकालने लगीं।
“आह… राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है। हाथों में जादू है तेरे। और ऊपर करो… जाँघों तक।”
उनकी आवाज में एक अजीब सी मिठास और कंपन था।
मैंने हिम्मत करके उनकी जाँघों तक मालिश शुरू कर दी।
साड़ी और ऊपर सरक गई। अब उनकी जाँघों का बड़ा हिस्सा मेरे सामने था। मेरे हाथ काँप रहे थे।
भाभी ने अचानक मेरे एक हाथ को पकड़ लिया और उसे अपनी जाँघों के और अंदर ले गईं।
भाभी ये क्या कर रही हैं? मैं घबरा गया।
“चुप कर राहुल। आज बहुत दिनों से मन कर रहा था,” भाभी ने मेरी आँखों में गहरी नजर डालते हुए कहा। “भैया तो महीने में एक-दो बार भी घर नहीं आ पाते। जब आते हैं तो थके-हारे सो जाते हैं। मुझे भी तो इंसान हूँ ना… प्यास लगती है।”
उनकी साँसें अब तेज हो चुकी थीं। गर्म हवा मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। उन्होंने खुद अपना पल्लू सरका दिया। ब्लाउज के ऊपर से उनकी भारी चूचियाँ उभर रही थीं, कपड़े में दबकर साफ नजर आ रही थीं।
मैं स्तब्ध बैठा था। भाभी ने मेरे दूसरे हाथ को भी पकड़कर अपने ब्लाउज पर रख दिया।
“दबा इन्हें जोर से… मुझे बहुत अच्छा लगेगा,” उन्होंने शरमाते हुए लेकिन इच्छा भरी आवाज में कहा।
मेरा दिमाग लड़ रहा था लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। मैंने उनके ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोल दिए। ब्रा में लिपटी उनकी भारी गोल चूचियाँ बाहर आ गईं। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही कड़े और खड़े हो चुके थे, हल्की-हल्की सिहरन के साथ।
मैंने दोनों हाथों से उन्हें दबाया। नरम लेकिन भारी मांस मेरी हथेलियों में भर गया। भाभी की आह निकल गई।
“आह… हाँ राहुल… और जोर से… चूस ले इन्हें… सालों से किसी ने ठीक से नहीं छुआ,” वे कराहते हुए बोलीं।
मैं झुक गया और एक चूची मुंह में ले ली।
गर्म, नरम और मीठी महक वाली त्वचा मेरी जीभ पर थी। मैंने होंठों से उसे घेर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। मेरी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी, कभी हल्का काट रही थी तो कभी जोर से चूस रही थी। भाभी मेरे बालों में उंगलियाँ फेर रही थीं, कभी-कभी उन्हें खींच रही थीं और कराह रही थीं।
“राहुल… तू बहुत अच्छा है… मुझे आज पूरी तरह चोद दे… मैं तेरी हूँ आज।”
उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी और मेरी पैंट का बटन खोल दिया।
मेरा लंड पहले से ही पूरा सख्त हो चुका था, तना हुआ और नसों से उभरा हुआ। उसकी मोटी शिराएँ स्पष्ट रूप से उभरी हुई थीं और सिर चमकदार लाल होकर फूला हुआ था। भाभी की नजर उस पर पड़ी तो उनकी साँसें भारी हो गईं।
भाभी ने उसे बाहर निकाला और मुट्ठी में कसकर पकड़ लिया। उनकी गर्म हथेली ने उसे जकड़ लिया। वे ऊपर-नीचे धीरे-धीरे हिलाने लगीं। उनकी नरम उँगलियाँ लंड की पूरी लंबाई पर फिसल रही थीं, कभी-कभी अंगूठे से उसके संवेदनशील सिर को सहलाती हुईं। हर हलके झटके के साथ मेरा शरीर सिहर उठता था।
“वाह… कितना मोटा और लंबा है तेरा लंड… भैया का तो आधा भी नहीं है,” उन्होंने आह भरते हुए कहा। “आज से ये मेरी चूत का मालिक है।”
भाभी ने मुझे सोफे पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं। उनकी साँसें तेज और गर्म थीं। उन्होंने अपनी साड़ी और पेटीकोट पूरी तरह ऊपर कर दिया। उनकी पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी, चूत के रस से भीगी हुई कपड़े से चिपक रही थी। गीले कपड़े से उनकी फूली हुई चूत की आकृति साफ दिख रही थी।
उन्होंने पैंटी उतारी। उनकी चूत साफ गुलाबी और पहले से ही रस से तर थी। बाहर निकले हुए छोटे-छोटे बालों के साथ वो चमक रही थी और उसमें से गर्म, मीठी महक आ रही थी।
उन्होंने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा और धीरे धीरे बैठने लगीं।
“आह राहुल… कितना मोटा है… आह… मेरी चूत फाड़ रहा है… धीरे… आह…” उनकी आवाज काँप रही थी, हर शब्द के साथ गहरी सिसकारी निकल रही थी।
धीरे धीरे पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। भाभी की आँखें बंद हो गईं। उनके चेहरे पर दर्द और आनंद का मिश्रण था। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं, अंदर का गर्म, गीला दबाव हर तरफ से महसूस हो रहा था।
वो ऊपर नीचे होने लगीं। उनकी चूचियाँ जोर जोर से उछल रही थीं। हर बार नीचे बैठते समय उनकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निगल लेती और ऊपर उठते समय चूचियाँ भारी-भारी होकर हिलतीं। उनकी साँसें फूल गई थीं और पसीना उनकी गर्दन से बह रहा था।
मैंने उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर दबाया और चूसा।
उनकी निप्पल्स मेरे मुँह में सख्त हो गई थीं। मैं जोर-जोर से चूसता और हल्का-हल्का काटता, जिससे भाभी की चीख निकल जाती। मेरी जीभ उनके सख्त निप्पल के चारों ओर घूम रही थी, कभी-कभी मैं पूरा निप्पल मुँह में लेकर जोर से चूसता तो भाभी का पूरा शरीर झुरझुरी से भर जाता। उनकी चूचियाँ मेरे हाथों में दब रही थीं, नरम लेकिन भारी, पसीने से गीली और गरम।
“हाँ… आह… और जोर से चोद मुझे राहुल… आह… भाभी की चूत को फाड़ डाल… उफ्फ… बहुत दिनों बाद मिला है असली मर्द… आह… गहरी चोदो…” उनकी आवाज़ में कराहट और माँग दोनों थी। हर झटके पर वो और जोर से चिल्ला रही थीं। उनकी सिसकारियाँ तेज होती जा रही थीं, साँसें फूल रही थीं और चेहरे पर आनंद की लाली छा गई थी।
मैंने उन्हें पलट दिया। अब भाभी कुत्ते की तरह घुटनों और हाथों के बल थीं।
उनकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने उनकी गांड पकड़ी और पीछे से जोर से लंड अंदर डाला।
“आआह… फट गई… लेकिन मजा आ रहा है… आह… और तेज चोदो मुझे… जोर जोर से…” भाभी की आवाज काँप रही थी, दर्द और खुशी के मिश्रण में वो कराह उठीं।
हर धक्के पर भाभी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। फच फच की आवाज के साथ उनका बदन हिल रहा था। मेरे तेज धक्कों से उनकी गोल गांड लहरा रही थी, हर बार लंड पूरी गहराई तक घुसता तो उनकी चूत के रस की छपछप की आवाज निकलती। उनकी कमर मेरे हाथों में कसकर पकड़ी हुई थी, पसीना उनकी पीठ पर बह रहा था।
मैं उनकी कमर पकड़कर तेज तेज धक्के मार रहा था।
भाभी कई बार झड़ चुकी थीं। हर झड़ने पर उनकी चूत मेरे लंड को जोर से निचोड़ती, अंदर की गर्म दीवारें सिकुड़तीं और ढेर सारा गर्म रस बाहर निकलता। उनकी टाँगें काँप रही थीं, साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं। उनके पूरे शरीर में तीव्र झुरझुरी दौड़ रही थी, चेहरे पर आनंद की लहरें उभर रही थीं और आँखें आधी बंद होकर बार-बार उलट रही थीं।
उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी।
रात भर हमने कई बार सेक्स किया। पहले सोफे पर फिर फर्श पर फिर उनके बेडरूम में। हर जगह उनके शरीर से पसीने की महक, चूत के रस की गीली छपछपाहट और हमारी मिली-जुली सिसकारियों से कमरा भर गया था।
भाभी ने मुझे तीन बार पानी छोड़ने दिया। पहली बार उनकी चूत में, जहाँ मेरा गर्म वीर्य उनकी गहराई तक भरा और बाहर निकलते समय उनके रस के साथ मिलकर बहने लगा। दूसरी बार उनके मुंह में, जहाँ उन्होंने लंड को गहरी तक चूसकर सारा रस निगल लिया और होंठों को चाटते हुए संतोष से आह भरी। तीसरी बार उनकी चूचियों और पेट पर, जहाँ सफेद, गाढ़ा वीर्य उनके निप्पल्स, गले और नाभि तक फैल गया।
हर बार वो मुझे और उकसातीं और “दो और पानी दो… मेरी चूत भिगो दो… आह… और भर दो…” कहतीं। उनकी आवाज़ में अभी भी कामुक भूख बाकी थी, उँगलियों से अपनी चूत को सहलाते हुए वो मेरे लंड को फिर से सख्त करने की कोशिश करतीं।
सुबह के चार बज चुके थे। हम दोनों थककर बेड पर लेटे थे।
भाभी मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थीं। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड को हल्के हल्के सहला रही थीं। नरम स्पर्श से थका हुआ लंड हल्का-हल्का सिहर रहा था।
उन्होंने धीरे से कहा, “राहुल आज जो हुआ वो हमारा राज रहेगा। भैया को कभी मत बताना। लेकिन जब भी वो बाहर जाएगा तू मुझे इसी तरह चोदना। मैं अब तेरे बिना नहीं रह सकती। पैर मालिश तो बस बहाना था, असल में मुझे तेरे लंड की बहुत जरूरत थी।”
मैंने उनके माथे को चूमा और बोला, “जितनी बार चाहो भाभी तुम्हारी चूत अब मेरी है। जब मन करे बस कह देना पैर दर्द कर रहे हैं।”
उस दिन के बाद भाभी के बहाने बदल गए। कभी पैर दर्द कर रहा है कभी कमर में दर्द है कभी आज ब्लाउज बहुत टाइट हो गया है खोल दो कभी रात को नींद नहीं आ रही पास सो जा।
और हर बहाने के पीछे एक ही मकसद था मुझे जबर्दस्ती अपने पास बुलाकर चुदवाना।
कभी कभी वो मुझे रसोई में खड़े खड़े चोदतीं कभी बालकनी में कभी बाथरूम में।
उनकी भूख दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। मैं भी अब उनका दीवाना हो चुका था।
भाभी की चूत उनकी चूचियाँ उनकी गांड सब कुछ मुझे पागल कर देता था।
ये कहानी अभी भी जारी है। भैया जब भी बाहर जाते हैं भाभी मुझे मैसेज करती हैं राहुल जल्दी आ। पैर बहुत दर्द कर रहे हैं।
और मैं जान जाता हूँ कि आज फिर भाभी की चूत मेरे मोटे लंड की राह देख रही है।