पति देखता रहा और पत्नी चुदती रही

Jeeju ka Lund: बड़ा लंड मिला जीजू का मुझे होली वाले दिन. मैं अपने पति के साथ बहन के घर गयी थी. वहां जीजू और मेरे पति ने दारू पी. मेरे पति धुत्त हो गये और जीजू मुझे छेड़ने लगे.

दोस्तो, मेरा नाम सुदीपा है.
मेरी उम्र 26 साल है. मेरी शादी आज से 7 साल पहले हुई थी.
मेरी एक बेटी है, जो अभी 6 साल की है.

मैं झारखंड की एक छोटी जगह से हूँ.
यह एक कस्बाई इलाका है.

मेरे पति का ट्रांसपोर्ट का बिजनेस है तो वे ज्यादातर बाहर-बाहर जाते रहते हैं.
मैं घर पर अकेली रहती हूँ.

मैं दिखने में एकदम गोरी-चिट्टी हूँ. मेरी हाइट 4 फीट 6 इंच है. पिछवाड़ा 34 इंच का उठा हुआ है और 32 इंच के रसभरे बूब्स आगे को निकले हुए हैं.
जब भी मैं घर से बाहर निकलती हूँ, तो क्या बताऊं दोस्तो … सभी मर्द मेरी चूचियों और गांड को घूरते रहते हैं.

आज मैं आपको अपनी हिंदी सेक्स स्टोरी में बताने वाली हूँ कि मैं एक गैर मर्द से चुद रही थी और मेरे पति ने मुझे चुदवाते हुए देख लिया था.

जब मुझे बड़ा लंड मिला जीजू का … वह होली का समय था.
पति भी घर पर थे.
हमारे साथ घर पर सास-ससुर भी आए हुए थे इसलिए हम दोनों पति पत्नी और हमारी बेटी के साथ थे और घर में बड़ी रौनक थी.

होली के दिन खाना बहुत किस्म के पकवान बने थे.
मेरे मायके से भी भाई आया था.

पति का तो छुट्टी का दिन था.

होली में दारू की दुकान बंद रहती है इसलिए उन्होंने अपने दोस्त को पहले ही फोन कर दिया था, तो उसने एक दिन पहले से ही दारू-बीयर आदि मंगवा कर रख ली थी.

सास ससुर घर के पीछे वाले कमरे में थे और पति अपने दोस्तों के साथ सुबह से ही घर में आगे की तरफ बने एक अलग कमरे में बैठ कर अपनी महफ़िल जमाए हुए थे.

उस दिन मेरे पीहर से मेरा भाई भी आया हुआ था तो वह भी अपने जीजा जी के साथ पीने में लग गया था.

अभी तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था.
खाना आदि हुआ और शराब की महफ़िल खत्म हो गई.

अब हम सब यानि अबीर गुलाल आदि लगाने के लिए एक दूसरे से मस्ती करने लगे.

पति के दोनों दोस्त अपने-अपने घर चले गए.

तभी मेरी बहन का फोन आया और उसने मुझे उसके घर आने के लिए कहा.
उसका घर पास में ही है.

तभी मेरे सास-ससुर मेरी ननद के घर जाने लगे और वे बोले- हम लोग कल आएंगे.
वे मेरी बेटी को लेकर गए.
उनके जाते ही घर खाली हो गया था.

अब हम दोनों बहन की ससुराल के लिए निकल गए.
पति बाइक पर मुझे ले जा रहे थे.
वहां जाकर मैंने सबको गुलाल आदि लगाया.

मेरे पति और मेरी बहन के पति दोनों मिल कर शराब पीने चले गए.
मैं अपनी बहन से बातें करने लगी.

धीरे-धीरे रात बढ़ने लगी.
मुझे भी चिंता होने लगी कि पति कब वापस आएंगे? घर भी जाना है.

हालांकि मेरा घर ज्यादा दूर नहीं था … सिर्फ 5 किलोमीटर पर ही था.

मैंने उनको फोन लगाया, तो पता चला कि उन्होंने बहुत ज्यादा शराब पी ली है, उन्हें होश ही नहीं है. वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं. वे बाजू वाले मकान में ही थे.
मैं उनके पास गई, तो देखा कि वे पूरी तरह नशे में चूर हैं.

फिर मेरी बहन के पति, जिसका नाम रणजीत था, मैंने उससे कहा- अब इनकी इस हालत में हम लोग घर कैसे जाएंगे?
रणजीत बोला- चलिए, मैं आप सबको घर छोड़ देता हूँ.

फिर जिस बाइक से हम लोग बहन के घर गए थे, उसी बाइक से हम लोग सब घर आ गए.

मैं अपने पति को कंधे का सहारा देती हुई उन्हें पकड़ी थी. दूसरी तरफ से रणजीत ने भी उन्हें पकड़ा हुआ था.

मैं और रणजीत मिलकर ले जाने लगे.

बीच-बीच में रणजीत का हाथ मेरी चूचियों को छूने लगता था तो मुझे उस वक्त जाकर मालूम चला कि ये मेरी चूचियों से खेलने के मूड में दिख रहा है.

फिर जब उसने मेरी तरफ देखा तो उस समय हम दोनों मिल कर मेरे पति को सहारा देते हुए ले जा रहे थे.
उस वक्त मेरे ब्लाउज की हालत अस्त व्यस्त हो गई थी और मेरे मम्मों की घाटी एकदम खुली दिखाई दे रही थी.

रणजीत की आंखें मेरी दूधिया चूचियों पर ही टिकी हुई थीं.
मेरी आधी से ज्यादा चूचियां उस समय बाहर निकलने को मचल रही थीं और मेरी बहन का पति मेरे दूध वासना से देख रहा था.

यह सोच कर मेरी टांगों के बीच सिहरन होने लगी, एक अजीब सा नशा सा छा रहा था.

मैंने उस दिन पिंक कलर की ब्रा और लाल रंग की साड़ी पहनी थी.
उसी समय रंजीत ने अपने हाथ से मेरे वक्षस्थल को छूते हुए एक दूध को लगभग दबा ही दिया.

मैं समझ गई कि यह हरकत इसने जानबूझ कर की है.
फिर भी मैं कुछ नहीं बोली.

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उसने मेरी तरफ देख कर एक मुस्कान दी और वापस से दूध को दबा दिया.

इस बार मैंने भी मुस्कुरा कर उसे देखा.
रणजीत समझ गया कि मैं राजी हूँ.

फिर मेरे पति को बेड पर लिटाकर उसने उन्हें चादर ओढ़ा दी.

रणजीत की नजर तो मुझसे हट ही नहीं रही थी.

मैंने रणजीत से पूछा- पानी पियोगे?
उसने कहा- नहीं नहीं, आज मैंने भी बहुत शराब पी रखी है. मुझे पानी नहीं पीना. कुछ और मिलेगा क्या?

मुझे तो पता था उसे क्या चाहिए था, लेकिन फिर भी मैं अनजान बनकर बोली- क्या चाहिए? बताओ, अगर मेरे पास होगा तो जरूर दूँगी!

तो उसने झट से मेरे हाथ पकड़ लिए और कहने लगा- आप तो मेरी बीवी से ज्यादा हॉट लगती हो. मैंने जबसे आपको देखा है, तबसे आपकी चूत मारने की बहुत इच्छा है!

मैं मन ही मन सोचने लगी कि मेरे पति तो मुझे खुश नहीं कर पाते तो क्यों न बहन के पति से ही अपनी खुजली मिटा लूँ?
उसके मुँह से निकली बातों से ही मेरी चूत से पानी निकलने लगा था.

फिर भी मैंने उसे आंख दिखाकर बोला- नहीं, ये सब पाप है. आप मेरी बहन के पति हो और मुझसे छोटे भी हो.
रणजीत बोला- अरे कोई बात नहीं, प्यार में सब चलता है.

फिर मैं बोली- नहीं रणजीत, कोई ने देख लिया तो? या फिर ये उठ गए तो?

रणजीत बोला- कोई नहीं देखेगा और रही बात तुम्हारे पति की, वे अब सुबह ही उठेंगे.
वह मुझसे आप की जगह तुम बोलने लगा था तो मुझे भी वह अच्छा लगने लगा था.

मैं बोली- अरे ये कितना भी ड्रिंक कर लें, मगर रात को दो-तीन बार उठते ही हैं. टॉयलेट जाने के लिए!
रणजीत बोला- कोई बात नहीं, हम दोनों मिल कर सब संभाल लेंगे, पहले तुम मेरे लौड़े को देखो. अभी तो तुम्हारी चूत गीली हुई है … लंड देखोगी तो तुम्हारे मुँह से लार गिरने लगेगी!

उसने इतनी बेशर्मी से लंड चुत कहा, तो मेरी टांगों में चिपचिपापन सा महसूस होने लगा.

तभी उसने मुझे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया.
उसके सख्त लौड़े का अहसास हुआ तो मेरी चुत मचल उठी.

मानो न मानो, उसका लौड़ा बहुत कड़क था … मुझे तो ऐसा लगा कि रणजीत का लौड़ा मेरी गांड में न घुस जाए.

फिर वह मुझे अपनी तरफ घुमाकर किस करने लगा.
मैं तो पहले से ही गर्म थी. मैं जल्दी से उठी और उसकी पैंट की ज़िप खोलने लगी.
अन्दर का नजारा देखा तो मैं हैरान रह गई.

उसके लौड़े का साइज़ गजब का था. वह 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा एक जबरदस्त लंड था.
मैंने उससे कहा- रणजीत, ये बहुत बड़ा है … मैं नहीं ले पाऊंगी!

रणजीत हंस कर मेरे दूध दबाते हुए बोला- अरे यार डरो मत, मैं प्यार से तुम्हारी चुत की चुदाई करूँगा!

मैं फिर से चुत चुदाई सुनकर गर्म हो गई और बोली- प्लीज़ आप धीरे-धीरे करना!
वह बोला- ओके!

फिर रणजीत ने मेरे बदन से पहले मेरी साड़ी उतारी और मुझे मेरे पति के सामने लिटाकर मेरी नाभि में जीभ डालकर होंठ से चूसने लगा.
उसके बाद धीरे-धीरे ऊपर से ही मेरी चूचियां दबाने लगा.

क्या बताऊं दोस्तो, मैं तो सेक्स से मरी ही जा रही थी. उसके सामने बिछ गई थी और जल्द से जल्द अपनी चुत में एक गैर मर्द के लौड़े को लेने के लिए बेताब हो उठी थी.

उसने मेरी ब्लाउज खोलकर पिंक कलर की ब्रा भी खोल दी. मेरी चूचियां आजाद हो गईं.
पहली बार कोई पराया मर्द मुझे चोदने वाला था … वह भी मेरे पति के सामने.

ये सोचकर तो मुझे डर भी लग रहा था.
मगर जब भी डर के साथ सेक्स होता है, तो उसमें एक अजीब सा रोमांच होता है … यह मैंने कहीं पढ़ा था.
ठीक वही स्थिति इस वक्त मेरे साथ हो रही थी.

रणजीत को भी इस बात का पता था लेकिन वह अनजान बना हुआ था क्योंकि उसे तो बस मुझे चोदना था.

उसने मेरी चूचियों को जोर-जोर से मसलना शुरू किया और मुँह में दबा कर निप्पल को दाँत से काटने लगा.
मुझे बहुत मजा आ रहा था.

फिर उसने मेरे पेटीकोट की डोरी खोल दी.
मैंने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई थी तो रणजीत बोला- वाह मैचिंग-मैचिंग पहनी है … अपनी जवानी को गुलाबी ब्रा पैंटी में छुपा कर रखा है.

मैं शर्मा गई.

अब रणजीत ने मेरी पैंटी उतारी तो वह हैरान रह गया बोला- अरे बाप रे इतनी शानदार है आपकी चूत … कोई नहीं ही बोल पाएगा कि आपकी एक बेटी भी है. आपने बहुत अच्छे से अपनी चूत की सेवा की है!
वह बार बार चुत कहता तो मुझे बड़ी सनसनी हो रही थी.

मैंने उसे बता दिया- मेरा पति तो ठीक से चोद नहीं पाता. हमारे बीच ज्यादातर तो इसी बात को लेकर झगड़ा होता रहता है रणजीत!
वह बोला- कोई बात नहीं, तुम्हारा पति जब भी घर पर नहीं हुआ करेगा, तो तुम मुझे बुला लिया करो.

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मैंने उसका लंड पकड़ते हुए कहा- हां, अब जल्दी से मुझे ठंडी कर दो रणजीत. मैं बहुत प्यासी हूँ.
उसने कहा- मेरे लौड़े को चूस कर प्यास करो न!

मैं कुछ नहीं बोली.

तो उसने मेरी गुलाबी चूत में अपनी जीभ की नोक को रख दिया.
मैं अब तक 2 बार झड़ चुकी थी.

उसने मेरी चूत के दाने को जीभ से फेरना शुरू किया.
मानो न मानो दोस्तो, उस वक्त मैं चरम सुख भोग रही थी.

फिर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और मुझ पर टूट पड़ा.
रणजीत ने लगभग आदेश देते हुए मुझसे कहा- मेरे लौड़े को मुँह में लो!

मैंने मना कर दिया- मुझे मुँह में लेना पसंद नहीं.
तो वह स्वर बदल कर बोला- एक बार लेकर तो देखिए, बहुत मजा आएगा.

मैं ना-नुकुर करती रही, लेकिन उसने अपना 8 इंच का लंड मेरे मुँह में घुसा दिया.
मुझे घिन आ रही थी, लेकिन क्या करती … लंड लेने के लिए मजबूर थी.

मैंने उसके लंड को अच्छे से चूसकर गर्म और गीला कर दिया.

रणजीत बोला- आपके घर पर वैसलीन है?
मैंने अलमारी के नीचे वाली बॉक्स की तरफ इशारा किया.

उसने वैसलीन को अपने लंड पर लगाया और मेरी चूत में भी वैसलीन को अपनी उंगली से भर दिया.

उसके बाद उसने मेरे पैर फैलाकर अपना लंड मेरी चूत की दरार पर रखा और धीरे से धक्का दिया.
उसके लंड ने मेरी चूत को चीरते हुए अपनी मुड़ी अन्दर घुसेड़ दी.

मैं अकबका गई कि ये क्या हुआ, तभी उसने जोर से दबाव दे दिया और उसका आधा मूसल लंड मेरी चुत के अन्दर घुसता चला गया.

मैं चीख उठी.

तभी मेरा पति करवट बदलने लगा.
हम दोनों रुक गए.

मैं डर गई कि अब ये टॉयलेट जाने के लिए उठेंगे.
मैंने रणजीत को पलंग के नीचे की तरफ इशारा किया.

वह मेरी चुत से लंड निकाल कर फटाफट नीचे घुस गया और मैंने अपने नंगे शरीर पर चादर ओढ़ ली.

मेरे पति उठे और बाथरूम की तरफ चले गए. मैंने ध्यान दिया कि मेरे पति अभी भी होश में नहीं थे.
बाथरूम में टॉयलेट करते-करते वे उधर ही फर्श पर बैठकर सो गए.

जब देर हो गई तो मैंने सोचा कि ये अभी तक नहीं आए, जाकर देखती हूँ.
मैं चादर लपेट कर बाथरूम में उन्हें देखने गई तो पाया कि वे सो रहे थे.

कुछ देर देखने के बाद मैं वापस आ गई.

फिर रणजीत को इशारा किया कि पलंग पर आ जाओ, अखाड़ा अपना हो गया है.

रणजीत ने पलंग पर आते ही अपना मोटा लंड हिलाया.
उसने अपने लौड़े को वैसलीन से चिकना कर रखा था.

उसने मेरे पैर फैलाए और मेरी चूत के दरार पर लंड को रखकर एक जोरदार झटका दे मारा.
इस बार उसका पूरे का पूरा लंड मेरी चूत को चीरते हुए अन्दर चला गया.

बड़ा लंड मिला जीजू का मेरी चूत में गया और मैं जोर से चीख उठी.

रणजीत ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया और बोला- पागल हो क्या, तुम्हारे पति को मालूम चल जाएगा तो क्या होगा?
मैं अपनी आवाज को बड़ी मुश्किल से दबाती हुई बोली- आपने एकदम से पेल दिया!

वह हंस दिया.
सच में मेरी जान पर बन आई थी.

उसने जब अपना लंड बाहर निकाला, तो मेरी चूत फटने की वजह से उसके लंड पर खून लग गया था.
रणजीत ने लौड़े पर खू.न देखा तो वह बोला- अरे तुम्हारी चूत तो अभी भी सील पैक लग रही है!

मैं शर्मा गई.
उसने मुझे फिर से धीरे-धीरे चोदना शुरू किया.

मुझे भी अब ठीक लगने लगा था तो मैं भी अपनी गांड हिलाने लगी थी.

उसने अपनी रफ्तार बढ़ा दी.
मैं सिसकारियां भरने लगी- उफ्फ माँ … ओह … ओह माय गॉड … फक मी … और जोर से … आज फाड़ दो मेरी चूत को … कम ऑन ऐसे ही!

वह मेरी चुत को भोसड़ा बनाने के अंदाज में मेरी लेता रहा और मैं भी उसके साथ गंदी भाषा बोलती हुई उससे चुदवाती रही.

अब तक मैं दो बार झड़ गई थी.

इस बीच मेरे पति ने कई बार मुझे आवाज दी लेकिन मुझे सुनाई नहीं दिया … क्योंकि मैं तो इतना मोटा लंड ले रही थी.

अब रणजीत धपाधप धक्के दे रहा था.
उसके बाद रणजीत ने सारा वीर्य मेरी चूत के अन्दर डाल दिया और बगल में लेट गया.

मुझे मालूम ही नहीं था तब तक कि इतना सब हो रहा था … और मेरे पति बाथरूम से बाहर आकर सब देख रहे थे.
जब मेरी नजर अपने पति पर पड़ी तो मेरी तो समझो जान ही सूख गई.

दोस्तों, आज की कहानी इतना ही.
अगली कहानी में बहुत जल्द बताऊंगी कि मेरे पति को देखने के बाद क्या हुआ.

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