भाई ने खुद अपनी बहन को गैंगबैंग गिफ्ट दिया

Bhai ke dost se gangbang sex story: मेरा नाम आयुषी है। आप लोगों ने मेरी पिछली कहानी(भाई के लंड पर पागल हो गई) जरूर पढ़ी होगी।

यह कहानी सर्दियों की है। जनवरी की कड़ाकेदार ठंड पड़ रही थी। मैं और मेरा भाई रम के पैग लगा कर मस्ती कर रहे थे। जैसा कि आप जानते हैं कि मेरे भाई और मेरे बीच अब भाई बहन जैसा कुछ नहीं रह गया था। हम बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड जैसे लिव इन में रहते थे।

सर्दियों में अक्सर हम दोनों रम के दो तीन पैग लगाकर ही मजा लेते थे। उस दिन शनिवार की शाम को भाई अपने किसी दोस्त की बर्थडे पार्टी से आया था। मैं फ्लैट में अकेली बैठी बोर हो रही थी और मेरा चुदने का भी बहुत मन कर रहा था।

भाई कमरे में आया तो मैंने उससे कहा, भाई रम खत्म हो रही है जाकर एक बोतल और ले आ। वो मेरी बात सुनकर बाजार गया और रम की दो बोतलें ले आया। उसने मेरे सामने बोतल का बैग रखा और खुद कपड़े बदलने चला गया।

उसने कपड़े चेंज किए और मेरे साथ आकर बेड पर रजाई में घुस कर बैठ गया। तब तक मैं अपना पैग खत्म कर चुकी थी। उसके आने से पहले भी मैं दो पैग पुरानी बोतल से लगा चुकी थी।

उसने अपने लिए एक और पैग बनाया और एक मेरे लिए भी। हम दोनों दारू पीते हुए चुदाई की बातें करने लगे। उसने मोबाइल पर एक ब्लू फिल्म लगा दी और हम दोनों फिल्म देखते हुए हंसी मजाक करने लगे।

उस फिल्म में एक कमसिन लड़की को तीन लड़के चोद रहे थे। एक उसी की गांड में लंड पेला हुआ था दूसरा चूत में फंसा हुआ था और तीसरा उस लड़की का मुंह चोद रहा था।

उस मस्त सेक्सी फिल्म को देखकर मेरी चूत में चुनचुनी होने लगी। मैंने अपने भाई का हाथ उठाकर अपनी चूत पर रख लिया। वो भी मेरी चूत को सहलाने लगा।

मैंने कहा बड़ी हॉट फिल्म लगाई है तूने नीचे की आग भड़क रही है। भाई बोला तेरी आग बुझाने के लिए तो मेरे पास लंड है मगर जैसा इस फिल्म में हो रहा है वैसा मजा लेना है तो दो लंड और चाहिएंगे।

मैंने गिलास खाली किया और बगल की दराज से सिगरेट की डिब्बी उठाकर एक सिगरेट निकालकर होंठों से दबाकर सुलगाने के लिए लाइटर खोजने लगी। तभी मेरे भाई ने मेरी सिगरेट में लौ दिखा दी और मैं कश खींचने लगी।

मैंने कहा तुमने मेरी गांड भी मार ली है और चूत भी चोद ली है। मेरे मुंह में भी अनेक बार अपने लंड को पेलकर मुझे अपना पानी पिलाया है। अब बस एक साथ तीन लंड लेने का मन है। किसी दिन बाहर चलने का प्रोग्राम बनाओ तो ये मजा भी ले लिया जाए।

वो बोला इसके लिए बाहर चलने की क्या जरूरत है यहीं तुम्हारे तीनों छेदों का इंतजाम करवा दूंगा। मैंने कहा यार तेरा मतलब क्या है क्या इधर ही मुझे रंडी बनाने का मन है। हंसकर मैंने कहा।

तो मेरा भाई मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरे एक दूध में अपना मुंह लगाकर निप्पल खींचने लगा। मुझे मजा आने लगा। मैं भी सिगरेट का धुंआ उड़ाती हुई उसे अपना दूध पिलाने का सुख लेने लगी।

मैंने सिगरेट बुझा दी और अपने एक हाथ से अपना दूध पकड़कर अपने भाई को चुसवाने लगी। साथ ही मैं अपने एक हाथ से भाई का लंड पकड़कर सहलाने लगी। वो भी साइड की टेबल पर रखा अपना गिलास उठाकर अपना पैग पीते पीते मजा लेने लगा। वो मेरी चूत भी सहला रहा था।

मुझे भी हमेशा की तरह मजा आ रहा था। मुझे दारू पीने के बाद चुदने में बहुत मजा आता है। फिर दो पैग और पीने के बाद वो रजाई में घुस गया और मेरे दोनों टांगें फैलाकर अपना मुंह मेरी चूत में रगड़ने लगा।

मैं बैठी थी और उसके सिर को अपनी चूत में दबा रही थी। मेरी कामुक सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं। ब्लू फिल्म की तरफ से मन हट चुका था तो भाई ने मोबाइल बंद कर दिया था।

मैं अब तक छह पैग पी चुकी थी। मुझे बहुत कम होश बचा था। मेरी आंखें बंद होने से पहले मुझे इतना याद है कि मेरे भाई का लंड मेरी गांड में था और उसकी चार उंगलियां मेरी चूत की गुफा के अंदर थीं।

दोबारा जब मेरी आंख खुली तो मैं हैरान रह गई। मेरे सारे छेद भरे थे। एक लंड मेरी गांड में एक चूत में और एक मेरे मुंह में था।

मैं सकपका कर उठी और चादर घसीटकर खुद को ढक लिया। मैंने भाई से पूछा ये सब कौन हैं और ये मेरे साथ क्या कर रहे हैं। भाई ने उन दोनों को दूसरे रूम में जाने को कहा। वो दोनों बिना कपड़े पहने ही चले गए।

फिर भाई ने मुझसे कहा कि वो दोनों उसके दोस्त हैं और उनमें से जो सुमित है उसका बर्थडे है। मैंने कुछ नहीं कहा बस अपने भाई को देखती रही।

उसने मेरी तरफ हंसकर देखा और बोला आज ही मौका मिल गया था कि मैं तुम्हारी इच्छा पूरी कर दूं तो मैंने ही इनको तुम्हारे ऊपर चढ़ जाने दिया था।

मैंने कुछ नहीं कहा बस भाई को देखने लगी। फिर उसने बताया सुमित तुमको बहुत पसंद करता है और बर्थडे गिफ्ट में उसे तुमको किस करना था।

मैंने कहा अगर किस करना था तो किस कर लेता ये सब क्या करने लगा था। उसने कहा अरे यार वो किस ही कर रहा था मगर तुमको नंगी देखकर उससे रहा नहीं गया। ऊपर से तुमने बिना ब्रा पैंटी के सिर्फ गाउन पहना था तो तुम्हारे मम्मे गाउन से बाहर झांक रहे थे। उसने अचानक से एक मम्मे पर अपना मुंह रख दिया और चूसने लगा।

मैंने कहा फिर तूने उसको मेरी चुदाई करने के लिए कह दिया। अरे नहीं यार पहले तो मैंने उसे हटाने की भी कोशिश की मगर मुझे लगा कि कहीं तुम्हारी नींद खराब न हो जाए इसलिए मैंने उसे नहीं रोका। फिर अपनी बात भी चल रही थी कि तीन लंड से चुदाई का प्रोग्राम बनाना है। तो मैंने सोचा कि आज मौका भी है और दस्तूर भी है तो लगे हाथ फायदा उठा लिया जाए।

अभी हम दोनों ये सब बात कर ही रहे थे कि तब तक वो दोनों रूम में वापस आ गए। उन दोनों ने अभी भी कपड़े नहीं पहने थे। दोनों के लंड हवा में लहरा रहे थे।

मेरी नजरें उनके मोटे लंबे लहराते लंड पर ही टिकी थीं और मेरे अंदर एक साथ तीन लंड लेने की भूख जागने लगी थी। तभी भाई ने उनसे कहा तुम दोनों रूम में जाओ मैं बात करके अभी आ रहा हूं।

मैंने अपने भाई का हाथ दबा दिया और उस वक्त उन दोनों ने भाई को किनारे धकेल दिया। मेरे भाई ने मेरा इशारा समझ लिया था इसलिए उसने कुछ नहीं कहा।

अब सुमित मेरे पास आकर चिपक कर बैठने की कोशिश करने लगा। मैं दूसरी तरफ हट रही थी मगर उधर उसका दूसरा दोस्त अपना लंड लहराते हुए खड़ा था।

सुमित मेरा हाथ पकड़कर बोला आयुषी तुम घबरा क्यों रही हो मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं मेरे पास आओ। मैंने भाई से झूठमूठ में कहा इन दोनों से कहो कि यहां से चले जाएं।

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भाई खुद ही उठकर मुंह लटकाकर दूसरे रूम में चला गया। सुमित के दोस्त ने लाइट बंद कर दी और सुमित ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मुझे पता था कि अब यहां रात भर क्या होना है। मेरे चीखने चिल्लाने से भी कोई फर्क नहीं पड़ना है।

मैंने हार मान लेने जैसा ड्रामा किया। सुमित ने मुझे खींचकर मेरे बाल मेरे सर के पीछे से पकड़े और अपना लंड मेरे मुंह में घुसा दिया। वो इतना ज्यादा एक्साइटेड था कि उसके गोटे तक मेरे मुंह में जा रहे थे और उसका लंड हर दूसरे सेकंड मेरे गले के अंदर तक।

उसका लंड पूरी तरह मेरे लिबलिबी थूक से लिपट चुका था और उसके गोटों से मेरा थूक टपक रहा था। उसका दोस्त मेरी गांड चाटने में लगा हुआ था। उसके दोस्त ने मेरी गांड के छेद को दो उंगलियां डालकर खोल रखा था और आगे दोनों अंगूठों से मेरी चूत फैला रखी थी।

वो अपनी जीभ कभी गांड के अंदर घुसाता कभी चूत के अंदर। दस मिनट तक मेरी चूत और गांड चाटने के बाद उसने मुझे सीधा लिटा दिया और सुमित से कहा सुमित अब तू चूत पी। मैं भी तो देखूं इसके मुंह की चूत कैसी है।

उसका कहने का आशय था कि वो मेरे गले की गहराई तक लंड पेलना चाह रहा था। सुमित मेरी चूत के पास पहुंच गया और उसका दोस्त मेरे मुंह के पास।

उसका दोस्त बेड पर चढ़ा और अपनी गांड मेरे मुंह पर रखकर मेरे चेहरे पर गांड मसलने लगा। फिर उसने पीछे से मेरे बाल पकड़े और मेरा मुंह अपनी गांड के छेद में रगड़ते हुए गाली देने लगा चाट रंडी साली।

वो बहुत जोर से दबा रहा था तो मैंने उसकी गांड चाटना शुरू कर दी। वो प्रेशर लगाकर अपनी गांड का छेद खोल देता था और जैसे ही मैं जीभ अंदर ले जाती थी गांड बंद कर लेता था। उसकी गांड एकदम साफ थी।

मैं उसकी गांड चाट रही थी और सुमित मेरी भोसड़ी को बड़ा भोसड़ा बनाने में लगा था। वो उसने अपनी चार उंगलियां और हथेली मेरी चूत में डाल रखी थी और बहुत जोर जोर से अंदर बाहर करने में लगा था।

मेरी चूत से इतना पानी निकल रहा था कि वहां पर पूरा बेड गीला हो चुका था। कुछ देर यही सब चलता रहा।

फिर सुमित ने मुझे उठाया और उल्टा करके अपनी गोद में बिठा लिया। मैं उसकी छाती की तरफ पीठ करके बैठी थी। उसने अपना पूरा का पूरा लंड एक ही बार में मेरी गांड में घुसा दिया।

सामने से उसके दोस्त ने आकर अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। अब दोनों लंड एक साथ मेरी चूत और गांड की गहराइयों का मजे ले रहे थे।

तभी सुमित ने मेरे भाई को आवाज दी आ जा भैन के लंड तेरे लिए भी अबी एक छेद अभी बाकी है भोसड़ी के। कुछ पल बाद भाई आया। उसने लाइट ऑन की।

तब तक सुमित मेरी चूत में ही झड़ चुका था। वो उठकर किनारे बैठ गया। भाई मेरे लिए एक पैग बनाकर लाया और एक अपने लिए भी।

सुमित का दोस्त मेरी गांड को अभी भी चोदे जा रहा था। पैग लेने के बाद भाई ने अपना लंड मेरी चूत में रखा और मेरे होंठ पीते हुए मुझे चोदने लगा।

सुबह दस बजे तक लगातार दस बार गैंग बैंग सेक्स के बाद ही मैं सो पाई। कुल मिलाकर लंड रस दस बार मेरी चूत और गांड में गया था। उसके बाद वो दोनों हरामी चले गए।

सुबह दस बजे सोने के बाद मेरी आंखें दो बजे खुलीं। मेरा उठने का बिल्कुल मन नहीं था क्योंकि रात भर इतनी चुदाई हुई थी कि मेरी सारी एनर्जी चूत और गांड के रास्ते बह गई थी।

मेरा भाई मेरे साथ ही रजाई में था। वो टीवी देख रहा था। मैं उसकी तरफ घूमी और उससे बोली ये तुम अपनी बहन के साथ कैसे करवा सकते हो।

वो बहुत अफसोस में दिख रहा था। फिर वो बोला यार मैं तो उन्हें मना करने ही वाला था पर एक तो वो लोग बिल्कुल माने ही नहीं और दूसरे तुमने भी मुझे हाथ दबाकर इशारा दे दिया था जिससे मैं समझा था कि तुमको एक साथ तीन लंड से चुदने का मूड है।

मैंने कहा हां मेरा ऐसा मूड तो था मगर तुम मुझे उठाकर बता देते न तो मैं अपने आपको कुछ रेडी कर लेती। मगर मादरचोदों ने बहुत ज्यादा चोद दिया। इतने की उम्मीद नहीं थी मुझे।

मेरा भाई मुंह लटकाकर बोला मुझे खुद कुछ समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं। मुझसे उसका इतना बुरा मुंह देखा नहीं जा रहा था।

मैंने हंसकर कहा अच्छा यहां आओ मेरे पास। मैंने उसे नीचे झुककर गले से लगा लिया। फिर मैंने उससे कहा भाई एक पैग बना दे हैंगओवर की वजह से सिर दर्द हो रहा है।

वो उठा और मेरे लिए एक पैग बनाकर ले आया। फिर हम दोनों टीवी देखने लगे। मैंने मूवी देखते देखते एक घंटे में फिर से कब तीन पैग मार लिए कुछ पता ही नहीं चला।

जैसा कि आपको पता ही है मुझे पीने के बाद चुदने में बहुत मजा आता है। रात भर इतनी चुदने के बाद भी मेरी गांड और चूत में खुजली शुरू हो गई थी।

हम दोनों रजाई में बैठे थे और पैरों के कमर तक रजाई डाल रखी थी। मैंने भाई की गोद में सर रख लिया। मुझे पता था कि अभी उसका लंड मेरा मुंह पास में पाकर खड़ा हो जाएगा।

दो मिनट बाद ही उसका लंड लोअर के अंदर सलामी देने लगा। मैंने ऊपर मुड़कर भाई की ओर देखा और मुस्कुराकर पूछा अब इसको क्या चाहिए जो इतना बेताब हो रहा है।

उसने झट से अपना लोअर नीचे करके अपना लंड मेरे मुंह में घुसा दिया। वो बोला इस भैन के लंड को अपनी भैन चोदने का मन हो रहा है।

मैंने भाई का लंड पकड़कर कहा तो इसमें इतना कड़क होने की क्या जरूरत है। सीधा घुस जाता अपनी बहन की चूत में। वो मेरे दूध दबाता हुआ बोला अरे यार दीदी तुम सारी रात चुदी थी न इसलिए मैं जरा झिझक रहा था कि पता नहीं तुम्हारी चूत लंड लेगी भी नहीं।

मैंने कहा अरे यार तुझे तो मालूम ही है कि मैं भले ही बाहर के कितने भी लंड ले लूं मगर अपने भाई का लंड लेने में मुझे जरा सी दिक्कत नहीं होती है।

मैं अब उसका लंड पूरे मजे से चूसने लगी और वो भी मेरे सर को अपने लंड पर दबाते हुए मेरे मुंह की चुदाई करता रहा। फिर वो झड़ गया तो मैं उसका सारा लंड रस पी गई।

उसका लंड रस मुझे बहुत पसंद है। जब वो झड़ता है तो पागलों की तरह मेरा मुंह चोदने लगता है। मुझे उसके साथ ओरल सेक्स में बहुत मजा आता है।

फिर मैंने उसे रजाई में कर दिया और खुद टांगें फैलाकर अपनी चूत की गुफा खोलकर बैठ गई। वो मेरी चूत चाटने लगा।

दस मिनट तक उसने मुझे पिया और फिर मुझे अपनी बगल में लिटाकर मेरी चूत में अपनी उंगलियां डाल दीं। वो उंगलियों से मुझे जोर जोर से चोदने लगा।

मेरी चूत पिछले चौबीस घंटे में इतनी चुद चुकी थी कि एकदम गुफा की तरह खुल रही थी। यही मेरी गांड का हाल था।

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मेरे भाई का अंगूठा छोड़कर पूरा हाथ मेरी चूत में घपाघप घुस रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरे मुंह से कामुक सिसकारियां निकल रही थीं आह आहह और जोर से और जोर से।

वो पूरी तेजी से अपने हाथ से मेरी चूत चोद रहा था। फिर उसने मेरी गांड में उंगलियां करना शुरू कर दिया।

उसने अपने पूरे हाथ पर बहुत सारी वैसलीन लगाई और ढेर सारी वैसलीन मेरी गांड के छेद में भर दी। उसने पहले दो उंगली करनी शुरू की फिर तीन पेल दीं फिर कुछ देर बाद चार उंगलियों से करने लगा।

मुझे मजा आ रहा था मैं कुतिया बनकर अपनी गांड में हाथ का मजा ले रही थी। कुछ देर बाद उसने अपना अंगूठा फिर अंदर ले जाने की कोशिश की।

अब मेरी गांड में थोड़ा दर्द हो रहा था पर मजा भी आ रहा था। मैंने अपनी गांड और ढीली करने की कोशिश की और उसने अपना अंगूठा भी मेरी गांड में घुसा दिया।

उसकी पूरी हथेली मेरी गांड में थी और वो अंदर अपनी उंगलियों से मेरी गांड के अंदर की दीवारों को रगड़ रहा था। मुझे ऐसा मजा अपनी गांड चुदवाने में कभी नहीं आया था।

बीस मिनट तक ऐसे ही चुदने के बाद उसने अपना लंड मेरी चूत में डाला और काफी देर तक मुझे चोदा। पूरा कमरा बस फच फच की आवाजों से गूंज रहा था।

चुदाई के बाद भाई बाहर सब्जी लेने चला गया। शाम को हम दोनों ने रम के चार चार पैग लगाए और एक मस्त सी ब्लूफिल्म देखकर मस्त चुदाई की और अपने भाई के साथ नंगी ही चिपककर सो गई।

अगले दिन मैं ऑफिस गई तो पता चला कि एक टीम को दो दिन बाद बैंगलोर जाना है जिसमें मैं भी हूं। मेरी टीम में तीन लड़कियां और दो लड़के थे।

मैंने भाई को सब समझा दिया और अच्छे से रहने के लिए बोलकर बैंगलोर के लिए निकलने लगी। मेरी टीम ट्रेन में सीट उपलब्ध न होने की वजह से बस से जा रही थी।

रास्ता बहुत लंबा होने की वजह से हमने वाल्वो में स्लीपिंग सीट्स बुक की थीं। मेरे साथ आई दोनों लड़कियां एक साथ बैठ गईं और दोनों में से एक लड़का मेरे पास।

शाम की बस होने की वजह से सब आराम करने लगे। एक घंटे का रास्ता कटने के बाद ही अंधेरा हो गया।

हम दोनों मैं और मेरा साथ काम करने वाला लड़का पंकज बातें कर रहे थे क्योंकि नींद न आने तक टाइम पास करने को कुछ तो चाहिए था।

करीब नौ बजे आसपास हम दोनों ने खाना खाने का सोचा। मेरा मूड रम पीने का था मगर उसके साथ मैं इतनी जल्दी खुलना नहीं चाह रही थी।

मैंने उससे कहा आगे किसी ढाबे पर खाना खा लेंगे इतनी जल्दी क्या है। वो बोला ओके मैं पूछता हूं कि बस कितनी देर में किसी ढाबे पर रुकेगी।

उसके पास बस के कंडक्टर का फोन नंबर था। उसने फोन से जानकारी करके मुझे बताया कि एक घंटा बाद ढाबे पर बस रुकेगी।

मैंने कहा ओके तब तक यदि तुमको कुछ भूख लगी हो तो कुछ स्नेक्स खा लो। वो हंसकर बोला स्नेक्स तो किसी चीज के साथ खाए जाते हैं। ऐसे अकेले स्नेक्स खाने का क्या मजा।

मैंने कहा हां तो किसी के साथ ले लो। मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। वो बोला तो तुम भी साथ दोगी न। मैंने हंसकर हामी भर दी।

उसने पूछा रम या व्हिस्की। मैंने कहा रम। उसने रम की बोतल निकाली और दो पैग बनाकर एक मुझे पकड़ा दिया। हम दोनों रम का मजा लेने लगे।

अब आपको तो मालूम ही है कि मुझे रम के बाद लंड की जरूरत होती है। लंड बाजू में था भी मगर तब भी मैंने कुछ इंतजार करने का सोचा।

कुछ देर बाद तीन तीन पैग बॉडी में मस्ती देने लगे थे। तभी बस रुक गई और हम दोनों ने ढाबे पर उतरकर खाना खा लिया।

हम दोनों बस में आ गए। मैं अपनी बर्थ पर बैठकर पानी पीने लगी थी पंकज भी पानी पी रहा था तभी बस में अचानक से एक धक्का लगा और पानी मेरे कुर्ते पर गिर गया।

वो सॉरी सॉरी बोलने लगा। मैंने कहा कोई बात नहीं। उसने कहा ठंड है इसे चेंज कर लो वर्ना सर्दी लग जाएगी।

मैंने कहा अरे कुछ नहीं थोड़ा सा ही गीला हुआ है। थोड़ी देर तक ऐसे ही हम दोनों बातें करते रहे।

अब वो मुझे थोड़ा अपनी ओर ज्यादा अट्रैक्टेड होता दिख रहा था। वो यहां वहां की रोमांटिक जगहों और लोगों की बातें करने में लगा था।

मुझे समझ आ रहा था कि वो क्या करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे ही बातें करते करते मैं भी उससे थोड़ा फ्रैंक होने लगी।

लगभग बारह बजे होंगे और फाइनली रोमांटिक बातों में बहकर वो बेचारा अपने जज्बात काबू में नहीं रख पाया। उसने मुझे किस कर लिया।

फिर वो एक सेकंड पीछे हटा और मेरी आंखों में देखने लगा। मैंने नॉर्मल रिएक्शन दिया क्योंकि मेरा बहुत टाइम से कोई बॉयफ्रेंड नहीं था।

ये देखते ही उसने मेरे होंठ अपने होंठों में भर लिए और कसके चूसने लगा। वो पागलों की तरह मेरे होंठ चूस रहा था जैसे किसी को पहली बार किस किया हो।

अब उसकी हिम्मत बढ़ रही थी। उसका हाथ मेरी चूचियों पर आ गया और वो मेरी चूचियां मसलने लगा। वो मेरे होंठों का रस पीते पीते मेरे मम्मे जोर जोर से मसल रहा था।

कुछ देर बाद उसने अपना हाथ मेरी सलवार में डाल दिया। मेरी चूत एकदम गीली थी। वो मेरे चूत के दाने को रगड़ने लगा और धीरे धीरे मेरी चूत में उंगली करने लगा।

फिर वो कुछ देर बाद उठकर नीचे गया और मेरी सलवार उतार दी और अपनी जीभ से मेरी सारी चूत चाटकर साफ कर दी।

इतना मजा मिलने के बाद मुझे अब लंड चाहिए था। मैंने उसे खींचकर ऊपर बुलाया और झट से उसकी पैंट की जिप खोलकर उसके लंड को आजाद कर दिया।

वो कुछ समझ पाता कि बिना किसी देरी के मैंने पूरा लंड एक साथ अपने मुंह में भर लिया। वो इतना उत्तेजित हो गया था कि उसने तुरंत ही अपना लंड रस मेरे मुंह में छोड़ दिया।

मैंने सारा रस पी लिया और पंद्रह मिनट तक उसके लंड को वैसे ही चूसती रही। उसका लंड फिर से एकदम कड़क हो गया था।

मैंने उसका लंड पकड़ा और अपनी गांड के छेद पर ढेर सारा थूक लगाकर उसे अपने अंदर पहुंचा दिया। एक घंटे में दो बार सेक्स इन बस में करके आगे पीछे से चुदने के बाद मैं सो गई।

बैंगलोर पहुंचकर हमने मीटिंग अटेंड की और फिर ओयो में जाकर खूब चुदाई का मजा किया। चार दिन बाद मैं वापस आई तो पता चला कि भाई मेरा दो दिन से बस टीवी ही देखे जा रहा है।

मैं आपको अपनी चूत की पहली बार हुई चुदाई की कहानी भी लिखूंगी आपको बहुत मजा आएगा।

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